संदीप शुक्ला, नई दिल्ली, NIT:

श्रीप्रकाश सिंह निमराजे को नई दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी दर्शन के बी एन पाण्डेय सभागार में आयोजित भव्य “पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह” में ‘जापान हिंदी भूषण’ से सम्मानित किया गया। यह समारोह टोक्यो, जापान से प्रकाशित अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ‘हिंदी की गूंज’ के पंचम वार्षिकोत्सव के अंतर्गत आयोजित हुआ।

नई दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी दर्शन के बी एन पाण्डेय सभागार में टोक्यो, जापान से प्रकाशित अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ‘हिंदी की गूंज’ के पंचम वार्षिकोत्सव समारोह के अंतर्गत “पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह” का भव्य आयोजन किया गया।
प्रथम सत्र: साहित्य और सम्मान
कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता का दायित्व वरिष्ठ प्रवासी साहित्यकार डॉ. दिव्या माथुर के सशक्त हाथों में रहा। मुख्य अतिथि की भूमिका वरिष्ठ साहित्यकार एवं ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीता कपूर ने वहन की।
विशिष्ट अतिथियों की श्रेणी में अंतरराष्ट्रीय प्रख्यात समाजसेवी श्री इंद्रजीत शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दुर्गा सिन्हा, प्रसिद्ध कश्मीरी साहित्यकार डॉ. मुक्ता शर्मा, ट्रू मीडिया के सर्वेसर्वा श्री ओमप्रकाश प्रजापति तथा हिंदी की गूंज की संस्थापिका एवं संपादक डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा मंचासीन रहे। संचालन का कार्यभार कवयित्री श्रीमती सोनिया अक्स ‘सोनम’ के सुपुर्द रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य विभूतियों के कर-कमलों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ हुआ। तत्पश्चात्, वात्सल्य संस्था की छात्राओं द्वारा नृत्य के माध्यम से मां सरस्वती वंदन की स्तुति में सुरमई प्रस्तुति से श्रद्धा-सुमन अर्पित किए गए।
कार्यक्रम को गति प्रदान करते हुए जहां एक ओर मंचासीन विभूतियों को सम्मानित किया गया, वहीं दूसरी ओर, इसी सत्र के दौरान विभिन्न चरणों में सभागार में विराजित देश-विदेश के शहरों एवं विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों के प्रमुख हस्ताक्षरों को भी माल्यार्पण, अंगवस्त्र, प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया गया। साथ ही, क्रमबद्ध तरीके से पुस्तकों के लोकार्पण की प्रक्रिया को भी मंचासीन विभूतियों के कर-कमलों द्वारा लोकार्पित करके सत्र को गतिमान बनाने में सहयोग दिया।
स्वागतीय उद्बोधन के माध्यम से डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा ने श्रोताओं को अपने व्यक्तिगत जीवन के कुछ अनकहे-अनसुने-अनछूए पहलुओं से अवगत कराया कि भारत में जन्मी वह 35 वर्ष पूर्व जापान कैसे पहुंची थीं और गैर-हिंदी सामाजिक परिवेश में कैसी-कैसी प्रतारणाओं को झेलते हुए अपना स्थान बनाया था।
उन्होंने बताया कि हिंदी को भी विश्व पटल पर यथोचित सम्मान दिलाने हेतु मन की बगिया में नवीन इच्छाओं के बीज अंकुरित हुए थे, जिसके बाद टोक्यो स्थित हिंदी कल्चरल सेंटर की स्थापना की गई थी। इसी के माध्यम से सर्वप्रथम अंतर्राष्ट्रीय त्रैमासिक ई-पत्रिका ‘हिंदी की गूंज’ का प्रारूप आप सभी के समक्ष आया था और आज यही पत्रिका प्रत्यक्ष स्वरूप में उपस्थित है।
अगले चरण में वात्सल्य संस्था के छात्र-छात्राओं ने ‘ब्लैंक चेक’ शीर्षक से कलात्मक शैली में अपनी नाट्य प्रस्तुति के द्वारा सभागार में उपस्थित जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया।
द्वितीय सत्र: सम्मान एवं लोकार्पण
द्वितीय चरण के आरंभ में गणमान्य विभूतियों को मंच पर अपना-अपना स्थान ग्रहण कराया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता का वहन वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती प्रमिला भारती ने किया। मुख्य अतिथि की भूमिका का वहन वरिष्ठ समाजसेवी, साहित्यकार एवं ग्वालियर गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष श्री श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने किया।
विशिष्ट अतिथियों की श्रेणी में सेवानिवृत्त चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट एवं कवि श्री ओम सपरा, नीदरलैंड की प्रवासी साहित्यकार डॉ. ऋतु नयन पाण्डेय, हिन्दी साहित्य परिषद, कलकत्ता के पदाधिकारी डॉ. संजय शुक्ल, साहित्यकार श्री गीतेश्वर बाबू ‘घायल’ तथा श्रीलंका की प्रवासी साहित्यकार एवं नृत्यांगना सुश्री जूलियन तक्षशिला विराजमान रहे। संचालन का दायित्व लेखिका एवं कवयित्री श्रीमती मोनिका नूर ने वहन किया।
इसी सत्र के दौरान श्री श्रीप्रकाश सिंह निमराजे को ‘जापान हिंदी भूषण’ से सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने स्वेच्छिक निवेदन के साथ डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा से आग्रह किया कि अगले वर्ष यह आयोजन ग्वालियर अथवा हाथरस में आयोजित किया जाए, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी वह स्वयं वहन करेंगे।
कुल मिलाकर आज के इस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न लेखकों एवं लेखिकाओं द्वारा रचित, संकलित और संपादित 18 पुस्तकों का भव्य लोकार्पण किया गया, जिनमें विशेषतः डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा की पांच नवीनतम कृति – “गूंज रही हिंदी, हिंदी की गूंज के दिये, शिंतो – जापान का सनातन धर्म, दालान की धूप, मेरा भारत महान, और जंगल में मंगल” प्रमुख हैं। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका ‘हिंदी की गूंज’ के दो नवीन अंकों का भी विधिवत लोकार्पण किया गया।
अंततः डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा ने कार्यक्रम में पधारे सभी प्रबुद्धजनों के प्रति कृतज्ञता सहित धन्यवाद और आभार ज्ञापित करने के साथ यह भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।
