मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

भारत के गौरवशाली इतिहास और सिख परंपरा के वैभव को समर्पित श्री गुरूगोविंदसिंह मेमोरियल म्यूजियम अब 38 करोड़ रुपए की संशोधित लागत से मूर्त रूप लेगा। यह परियोजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा श्री गुरूगोविंदसिंह जी की 350 वीं जयंती को भव्य स्वरूप में मनाने के तहत घोषित महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है।
बुरहानपुर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने इस महत्वपूर्ण परियोजना की प्रगति सुनिश्चित करने हेतु भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अवर सचिव, पर्यटन निगम के एसडीओ एवं उपयंत्री के साथ स्थल का भ्रमण कर निर्माण की संपूर्ण स्थिति का निरीक्षण किया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि निर्माण कार्य को पूर्ण करने हेतु पुरातत्व विभाग ने नया प्रस्ताव शासन को भेजा तथा पुनः टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है। जल्द ही नई निर्माण एजेंसी तय कर कार्य आगामी एक माह में कार्य युद्धस्तर पर शुरू कराया जाएगा।
निर्माण लागत बढ़ने से रुका था कार्य, अब पुनः पटरी पर
श्रीमती चिटनिस ने बताया कि प्रारंभिक स्वीकृति के अनुसार लगभग 17 करोड़ रुपए की लागत से म्यूजियम का निर्माण होना था, परंतु निधि के अभाव एवं निर्माण में विलंब के चलते अब यह लागत बढ़कर 38 करोड़ रुपए से अधिक हो गई है। उन्होंने इस संबंध में केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के विवेक अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट, पत्राचार एवं विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से लगातार प्रयास किए। इनके परिणामस्वरूप केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा 21 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई।
खांडा आकार में बनेगा तीन मंजिला भव्य म्यूजियम
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा श्री गुरूगोविंदसिंह जी की 350वीं जयंती अवसर पर बुरहानपुर को यह महत्वपूर्ण सौगात प्रदान की गई थी। उसी घोषणा को साकार करने हेतु यह म्यूजियम खांडा आकार की अनूठी डिजाइन में निर्मित हो रहा है। भवन की प्रमुख विशेषताएँ:- कुल निर्माण क्षेत्ररू 6279 वर्ग मीटर। ग्राउंड दो फ्लोर (तीन मंजिला)। 500-सीटर अत्याधुनिक ऑडिटोरियम। पार्किंग, पार्क एवं पाथवे। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम।
अत्याधुनिक गैलरियों में दशम गुरू की जीवनी, रचनाएँ, युद्धशैली, दर्शन और साहित्य का प्रदर्शन। म्यूजियम में सिख पंथ की संस्कृति, इतिहास एवं गुरू परंपरा का समग्र दस्तावेजीकरण। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि यह भवन केवल एक संरचना नहीं, बल्कि आने वाली पीढि़यों को भारतीयता, वीरता, त्याग और समरसता का संदेश देने वाला सांस्कृतिक धरोहर केंद्र होगा।
श्री गुरू गोविंदसिंह जी और बुरहानपुर का अमिट रिश्ता-6 माह 9 दिन का पावन प्रवास
17वीं शताब्दी की ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए श्रीमती चिटनिस ने बताया कि गुरु गोविंदसिंह जी नांदेड जाते समय 6 माह 9 दिन तक बुरहानपुर में पधारे थे। इसी दिव्य प्रवास के दौरान उन्होंने विश्व-विख्यात सुनहरी बीड़ (गुरुग्रंथ साहब) को लिपिबद्ध करवाया था। इस बीड़ के प्रत्येक पन्ने पर सुनहरी बेलबूटों की अद्भुत चित्रकारी है। अंतिम पन्ने पर गुरु गोविंदसिंह जी ने स्वयं सुनहरी स्याही से ‘ॐकार’ अंकित किया था।
यह बीड़ संपूर्ण विश्व की एकमात्र ऐसी पवित्र धरोहर है जिसकी यह विशिष्टता है। गुरूद्वारा बड़ी संगत के पीछे स्थित पूजास्थल एवं प्राचीन कुआँ आज भी गुरूजी के प्रवास की पावन स्मृतियों को संजोए हुए हैं। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि जो समाज अपने इतिहास को भूल जाता है, वह भविष्य नहीं बना सकता। यह म्यूजियम हमारे इतिहास, हमारी जड़ों और हमारी आस्था का जीवंत प्रतीक होगा।
प्रधानमंत्री मोदी के विज़न से लेकर आज तक-निरंतर प्रयास
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा के बाद बुरहानपुर विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस ने इस परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए लगातार उच्च अधिकारियों, समिति सदस्यों और मंत्रियों के साथ संपर्क में रहकर कार्य को आगे बढ़ाया। वे विशेष रूप से सिख समाज की 350वीं जयंती समारोह समिति के अध्यक्ष तत्कालीन केन्द्रीय गृह मंत्री व वर्तमान रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, स्व. सुषमा स्वराज, डॉ. महेश शर्मा, डॉ. एस.एस. अहलुवालिया आदि से संवाद कर प्रगति में अहम भूमिका निभाती रहीं।
