मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

छिंदवाड़ा जिले की जुन्नारदेव जनपद पंचायत के ग्राम नजरपुर में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी जांच आदेश को पंचायत स्तर पर लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्राम पंचायत नजरपुर के पंचों और ग्रामीणों की शिकायत के बाद सीएम कार्यालय ने जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक के असहयोग के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। जांच दल को बार-बार बहाने बनाकर लौटा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
क्या है पूरा मामला
नजरपुर के ग्रामीणों और पंचों ने हाल ही में जिला कलेक्टर को जनसुनवाई के दौरान शिकायत पत्र सौंपकर अपनी समस्याएं बताईं। शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव द्वारा लगातार वित्तीय अनियमितताएं की जा रही हैं। हाल ही में बिना किसी पंचायत बैठक और प्रस्ताव के 6–7 लाख रुपये की बड़ी राशि का आहरण कर लिया गया। जब खर्च का विवरण मांगा गया तो देने से साफ इंकार कर दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि यह पहला मामला नहीं है—पहले भी लगाए गए कई आरोप जांच में सिद्ध हो चुके हैं, लेकिन भ्रष्टाचार का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
जांच दल को लौटाया जा रहा बैरंग
भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय, भोपाल तक पहुंचने पर वहां से जांच के आदेश जारी हुए। जांच दल कई बार पंचायत कार्यालय पहुंचा, लेकिन हर बार सरपंच और सचिव आवश्यक दस्तावेज—जैसे कैशबुक, निर्माण कार्यों की फाइलें, बिल-वाउचर आदि—उपलब्ध नहीं कराते। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार “दस्तावेज अधूरे हैं” या “कैशबुक पूरी नहीं है” जैसे बहाने बनाकर जांच टीम को वापस भेज दिया जाता है।
जांच दल को लौटाया जा रहा बैरंग
भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय, भोपाल तक पहुंचने पर वहां से जांच के आदेश जारी हुए। जांच दल कई बार पंचायत कार्यालय पहुंचा, लेकिन हर बार सरपंच और सचिव आवश्यक दस्तावेज—जैसे कैशबुक, निर्माण कार्यों की फाइलें, बिल-वाउचर आदि—उपलब्ध नहीं कराते। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार “दस्तावेज अधूरे हैं” या “कैशबुक पूरी नहीं है” जैसे बहाने बनाकर जांच टीम को वापस भेज दिया जाता है। जनपद पंचायत के पंचायत निरीक्षक और अन्य अधिकारी भी तीन बार निरीक्षण कर पंचनामा बना चुके हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
विकास कार्य ठप, ग्रामीणों की सख्त कार्रवाई की मांग
पदाधिकारियों के इस रवैये के कारण सीएम कार्यालय के जांच आदेश का पालन नहीं हो पा रहा है, और गांव के विकास कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर अब तक लाखों रुपये का गबन हो चुका है। उन्होंने कलेक्टर से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि जांच में सहयोग न करने वाले सरपंच और सचिव से सरकारी दस्तावेज जब्त किए जाएं। शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री को भी भेजी गई है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।
