आशाओं ने प्रदेशव्यापी आह्वान पर चेतावनी मार्च निकालकर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन | New India Times

अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

आशाओं ने प्रदेशव्यापी आह्वान पर चेतावनी मार्च निकालकर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन | New India Times

उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन संबद्ध ऐक्टू ने संविधान दिवस पर प्रदेशव्यापी आह्वान पर बालसन चौराहा से जिलाधिकारी कार्यालय तक चेतावनी मार्च निकालकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। चेतावनी मार्च के दौरान आज करो अर्जेंट करो हमको परमानेंट करो, आशा व आशा संगिनी को राज्य कर्मचारी का दर्ज़ा दो, 2000में दम नहीं 21000 से कम नहीं नारे लगा रही थी।

सरकार द्वारा लाए गए मजदूर विरोधी 04 श्रम कानून को वापस लेने की मांग करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर ऐक्टू प्रदेश सचिव कॉ अनिल वर्मा ने कहा कि प्रदेश में आशा और संगिनी वर्षों से राज्य और केंद्र के अनेक कार्यों की घोषित प्रोत्साहन राशियों से वंचित हैं और सरकारों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वादाखिलाफी की शिकार हैं।

2019 से लम्बित भुगतानों की अदायगी के सम्बन्ध में पिछले तीन वर्ष से अधिक समय से प्रदेश की आशा और संगिनी लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रही हैं। किंतु उनकी आवाज को सुनना भी उचित नहीं समझा गया।

प्रधान मंत्री जी की सबसे बड़ी लोकहिताय योजना आरोग्य भारत के सपने को साकार करने में गोलडान आयुष्मान कार्ड, आभा आई डी बनाने में किए गए वर्षों से अब तक किए गए योगदान के रु 225 करोड़ में एक रुपए भी नहीं दिया गया। शायद आशा और संगिनी के साथ इन दोनों कार्यों के लिए आपके मातहतों द्वारा की गई क्रूरता और उत्पीडन याद नहीं होगा।

आशाओं ने कहा कि 6 अक्टूबर को माननीय मुख्यमंत्री महोदय और 13 अक्टूबर 2025 को स्वास्थ्य मंत्री महोदय और आपको भेजे गए मांगपत्र और साथ में ही मांगी के न पूरे होने की दशा में 1 नवम्बर 2025 को पूर्ण कार्यबंदी के बाबजूद भी अभी तक भुगतान भी नहीं किए गए और न ही अन्य मांगो का ही समाधान किया गया। समय वार्ता बुलाकर मांगो को पूरा नहींखिया गया तो हड़ताल के लिए विवश होना पड़ेगा।

आशाओं ने आज वर्ष 2025 का कई माह के बकाया आधार प्रोत्साहन राशि राज्य वित प्रतिपूर्ति राशि और अन्य अभियानों मैं किए गए योगदान के भुगतान तत्काल किए जाएं तथा 30 अक्टूबर तक वर्षों से लम्बित प्रोत्साहन राशियों की अदायगी सुनिश्चित करने, आशा, आशा संगिनी को मानद स्वयंसेवक (honorary volunteer) के बजाय 45 वे भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश के अनुरूप सरकारी कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत किया जाय तथा प्रोत्साहन राशि के बजाय न्यूनतम वेतन लागू किया करने, आशा, आशा संगिनी को ईपीएफ, ईएसआई का सदस्य बनाने, सेवा निवृत्ति पर ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित करने,10 लाख स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख का जीवन बीमा सुनिश्चित करने, बेहतर कार्य दशा उपलब्ध कराते हुए कार्य की सीमा तय करने, न्यूनतम वेतन लागू होने तक आशा कर्मियों को आधारभूत मानदेय 21000 / तथा आशा संगिनी को रु 28000 / करने, जननी सुरक्षा से जुड़े बुनियादी कार्य के अलावा अन्य कार्यों की उत्प्रेरण राशियों का निर्धारण कर नियमित और पारदर्शी ढंग से भुगतान करने,आशा संगिनी कर्मियों की भ्रमण यात्रा भता दिया जाए या उनके आवागमन के लिए स्कूटी उपलब्ध कराने समेत 14 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। आज प्रदर्शन में सभी ब्लाकों से सैकड़ों आशा वर्कर्स शामिल रहीं।
     

By nit

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