तारिक़ खान, ब्यूरो चीफ, रायसेन (मप्र), NIT:
जिला अस्पताल इन दिनों इलाज से ज्यादा, अव्यवस्थाओं की वजह से सुर्खियों में है। अस्पताल परिसर में पार्किंग शुल्क को लेकर रोज़ाना विवाद खड़े हो रहे हैं, जैसे अस्पताल नहीं बल्कि जंग का मैदान हो। ताज़ा वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि पार्किंग रसीद न काटने पर किस तरह बहस से मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
लोगों का कहना है कि पार्किंग ठेकेदार मनमानी वसूली कर रहे हैं — न कोई बोर्ड लगा है, न दरें निर्धारित हैं, और न ही नियमों का पालन किया जा रहा है। मरीजों के परिजन परेशान हैं और वसूली करने वालों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
सबसे शर्मनाक स्थिति रात के समय दिखती है, जब जिला अस्पताल परिसर शराबियों के अड्डे में बदल जाता है। नशे में धुत लोग इधर-उधर घूमते रहते हैं, जिससे महिलाओं और मरीजों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगता है।
इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह मौन है। न कोई निगरानी की जा रही है, न कार्रवाई होती दिख रही है — मानो जिला अस्पताल उनकी जिम्मेदारी नहीं हो।
अब जनता की प्रशासन से सीधी मांग है—
पार्किंग की मनमानी वसूली पर रोक लगाई जाए, सुरक्षा गश्त बढ़ाई जाए, और अस्पताल को उसकी मूल भूमिका में वापस लाया जाए।
