मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
महाराष्ट्र उर्दू साहित्य अकादमी के नवनिर्वाचित चेयरमैन डॉ. हसीन अख्तर का मिल्लत इंग्लिश स्कूल, गेवराई पहुँचने पर शिक्षकों और विद्यार्थियों की मौजूदगी में शानदार और उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत तिलावत -ए-कुरआन पाक से हुई। इसके बाद कार्यक्रम के कुशल संचालनकर्ता (नाज़िम) जनाब मुजतबा नज्म ने मुख्य अतिथि तथा महाराष्ट्र उर्दू साहित्य अकादमी के नवनिर्वाचित चेयरमैन जनाब डॉ. सैयद अख्तर एच साहब का तआर्रुफ़ (परिचय) पेश करते हुए उनकी शैक्षणिक, साहित्यिक और संगठनात्मक सेवाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र उर्दू साहित्य अकादमी के माननीय अध्यक्ष डॉ. सैयद हसीन अख्तर साहब का आगमन स्कूल के लिए गौरव ,सम्मान और सौभाग्य की बात है।
इसके बाद मुख्य अतिथि और अकादमी के चेयरमैन डॉ. सैयद हसीन अख्तर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उर्दू भाषा की व्यापक महत्ता, उसके साहित्यिक ख़ज़ाने, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और आधुनिक दौर की आवश्यकताओं को प्रभावी अंदाज़ में बयान किया। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उर्दू भाषा केवल माध्यम-ए-तालीम ही नहीं, बल्कि एक महान तहज़ीब का आईना भी है।
इस भाषा ने सदियों का इतिहास, शायरी, साहित्य, शोध और फ़िक्री विरसे को संरक्षित रखा है। उन्होंने कहा कि अगर नई पीढ़ी उर्दू के साहित्य, शब्दकोश, इतिहास और शोध से जुड़ेगी तो वह केवल अपनी भाषा ही नहीं, बल्कि अपनी पहचान, संस्कृति और शैक्षणिक परंपरा से भी जुड़ जाएगी।
डॉ. सैयद हसीन अख्तर साहब ने विद्यार्थियों को यह भी सलाह दी कि वे उर्दू के नामवर अदीबों, शायरों और विचारकों का अध्ययन करें, क्योंकि भाषा की मज़बूती अध्ययन, अभ्यास और अभिव्यक्ति से ही पैदा होती है। उन्होंने छात्रों के कुछ प्रश्नों के उत्तर भी दिए और उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया कि आज भी उर्दू आधुनिक विज्ञान, टेक्नोलॉजी और सामाजिक विज्ञानों के इज़हार के लिए एक प्रभावी भाषा है।
इस मौके पर जनाब मुजतबा नज्म, जनाब सैयद इरफ़ान (प्रिंसिपल, मिल्लत इंग्लिश स्कूल), रगीबुर्रहमान इनामदार और अब्दुल ग़फ़्फ़ार सर ने डॉ. सैयद हसीन अख्तर का स्वागत किया और उन्हें स्कूल की गतिविधियों तथा शैक्षणिक माहौल से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि डॉ. सैयद हसीन अख्तर की रहनुमाई से छात्रों में भाषा के प्रति प्रेम और अधिक मज़बूत होगा।
कार्यक्रम के अंत में दुआई क़लिमात पेश किए गए और मुख्य अतिथि को उनकी सेवाओं के लिए धन्यवाद दिया गया। प्रतिभागियों ने इस संबोधन को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक और उद्देश्यपूर्ण क़रार दिया। कार्यक्रम का संचालन जनाब मुजतबा नज्म ने बहुत ख़ूबसूरती और शाइस्तगी से अंजाम दिया।
