मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, इंदौर (मप्र), NIT:
“जो मुँह में आया, बक दिए” — यह कहावत आजकल उन कुछ लोगों पर सटीक बैठती है जो बिना तथ्यों को जाने, इस्लामी मदरसों पर बेबुनियाद टिप्पणियाँ करते हैं। ऐसे लोगों के लिए यह ख़बर क़ाबिले-ग़ौर है।
मध्य प्रदेश के इंदौर का मशहूर और मारूफ़ इदारा तैबा कॉलेज ऑफ़ इंटीग्रेटेड स्टडीज़ (धार्मिक शिक्षण संस्थान) अपने मुनफ़रिद निज़ाम-ए-तालीम (विशिष्ट शिक्षा प्रणाली), जामे निसाब (समग्र पाठ्यक्रम) और दीन व दुनिया की तालीम (धार्मिक और आधुनिक शिक्षा) के हसीन इम्तेज़ाज (सुंदर संयोजन) की बदौलत क़लील मुद्दत (कम समय) में ही नुमाया मुक़ाम (उल्लेखनीय स्थान) हासिल कर चुका है।
हाल ही में इदारे के फ़ारिग़ुत्तह़सील (स्नातक) मौलाना एडवोकेट सना अलमुस्तफ़ा अंसारी ने तैबा कॉलेज के आठ साला फ़ज़ीलत व ग्रेजुएशन कोर्स की तकमील के बाद मरकज़ लॉ कॉलेज, केरल से एल.एल.बी (वकालत) की डिग्री हासिल कर इदारे का नाम रोशन किया है। यह कामयाबी उनकी इल्मी जिद्दोजहद (शैक्षणिक मेहनत) और तैबा कॉलेज की उस तालीमी व तर्बियती कार्यप्रणाली का नतीजा है, जो दीन व दुनिया के संगम से एक मुतवाज़िन, बाकिरदार और बासलाहियत नस्ल की तैयारी में मशगूल है।
तैबा कॉलेज, इंदौर — जो जामिआ मरकज़ुस्सकाफ़तुस्सुनिय्या की एक फ़आल और मुमताज़ शाख़ है — कम समय में अपनी तर्बियती फ़िज़ा, उम्दा नज़्म व ज़बत और निसाब-ए-तालीम की जिद्दत की वजह से तालीमी मैदान में मुमताज़ हैसियत हासिल कर चुका है। यहाँ के फ़ारिग़ीन (पूर्व छात्र) मुख़्तलिफ इल्मी, दीनि और पेशेवराना मैदानों में नुमाया ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं।
जहाँ मध्य प्रदेश के अन्य इदारों को बासलाहियत तलबा की क़िल्लत का सामना है, वहीं तैबा कॉलेज में दाख़िले के मौक़े पर तलबा का जम-ए-ग़फ़ीर (भीड़) देखा जाता है, जो इस इदारे के मयार-ए-तालीम (शिक्षा स्तर) और असातिज़ा (शिक्षकों) की मेहनत व इख़लास का वाज़ेह सबूत है।
इदारे के ज़िम्मेदारान ने मौलाना सना अलमुस्तफ़ा अंसारी को दिली मुबारकबाद पेश करते हुए दुआ की कि अल्लाह तआला उनके इल्म व अमल में बरकत अता फरमाए, उन्हें क़ौम व मिल्लत का नाफ़े-सर्माया (लाभदायक व्यक्ति) बनाए, और तैबा कॉलेज के मिशन-ए-तालीम व तर्बियत को और ज़्यादा उरूज व इर्तेक़ा (ऊँचाइयाँ और तरक्की) अता करे।
