रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:
मेघनगर में रोजगार और क्षेत्रीय विकास के उद्देश्य से सन् 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की गई थी। परंतु वर्तमान में संचालित कुछ केमिकल फैक्ट्रियों के संचालकों ने सरकार की विकासशील मंशा को दरकिनार कर केवल अपने निजी लाभ को प्राथमिकता दी है। इनके द्वारा फैलाए जा रहे रासायनिक प्रदूषण से क्षेत्र की हवा और जल संसाधन गंभीर रूप से प्रदूषित हो रहे हैं, जिससे आम जनता एवं पशुधन के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।

पिछले कुछ समय से विशेष रूप से कुछ ऐसे केमिकल उद्योग, जो टायर से ऑयल बनाने का काम करते हैं, शासन की पर्यावरणीय नियमावली को नजरअंदाज करते हुए रात के समय अपने प्लांट चलाते हैं। इनसे निकलने वाली तीखी दुर्गंध और जहरीला धुआं नगर की हवा में घुलकर लोगों के लिए सामान्य सांस लेना भी मुश्किल बना रहा है।

जीवन बचाओ आंदोलन के दौरान कुछ समय के लिए इन फैक्ट्रियों ने स्वयं को नियमों का पालन करने वाला दिखाया था, लेकिन आंदोलन खत्म होते ही स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। हैरानी की बात है कि इस गंभीर समस्या पर फैक्ट्री संचालक और संबंधित विभाग दोनों ही मौन हैं।

ट्रीटमेंट प्लांट होते हुए भी वेस्ट बिना प्रोसेस के छोड़ा जा रहा इन उद्योगों के लिए शासन द्वारा वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था की गई है, लेकिन कई संचालक वेस्ट को प्लांट में प्रोसेस करने की जगह गड्ढों और नालों में सीधे छोड़ रहे हैं, जिससे भूमिगत जल और आसपास के जलस्त्रोत तेजी से प्रदूषित हो रहे हैं।

रात में सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं यह कारखाने इन फैक्ट्रियों का अधिकतर संचालन रात में होता है, जब निगरानी कम रहती है। रातभर निकलने वाला जहरीला धुआं सुबह होते-होते पूरे क्षेत्र की हवा में मिल जाता है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और सिरदर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं। समाज और प्रशासन के सामने अब बड़ा प्रश्न यह है कि: कब तक विकास के नाम पर जनता की सेहत से समझौता किया जाता रहेगा?
