वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:
नगर पंचायत खीरी में बन रहा रामलीला पार्क पिछले दो वर्षों से अधर में लटका हुआ है। टेंडर पास और शिलान्यास होने के बावजूद पार्क की भूमि और नक्शे को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। निर्माण कार्य के दौरान कहीं नींव खुदाई और कहीं मिट्टी पटाई जैसे कार्य बिना सही सीमांकन के किए जा रहे हैं। इसी बीच एक बेवा महिला की निजी भूमि पर कब्ज़ा किए जाने का मामला सामने आया है, जिसकी शिकायत पीड़िता ने राजस्व मंत्री सहित कई अधिकारियों को भेजी है।
पीड़िता परवीन बेगम, निवासी मोहल्ला शिव कालोनी (चौकी संकटा देवी), लखीमपुर-खीरी ने बताया कि उनके पति स्व. शाहिद अली ने वर्ष 2016 में गाटा संख्या 14 के जुज़ भाग में स्थित 15×80 फुट का एक प्लाट खरीदा था। इसमें से आगे का 15×30 फुट हिस्सा 24 अक्टूबर 2016 को शाहिद अली के नाम और पीछे का 15×50 फुट हिस्सा 9 जनवरी 2017 को परवीन बेगम के नाम विधिवत रजिस्ट्री किया गया था।
दोनों हिस्सों का दाखिल-खारिज नगर पंचायत में दर्ज है। पति की लम्बी बीमारी और फिर 23 मई 2025 को मृत्यु के कारण परवीन बेगम आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं, जिस कारण वह जमीन की चौहद्दी समय पर नहीं करा सकीं। पर जब वह हाल ही में अपनी जमीन देखने पहुँचीं तो पाया कि पार्क निर्माण के नाम पर उनकी भूमि में नींव खुदवा दी गई है।
जब पीड़िता ने ठेकेदार हेमू गुप्ता से इस बारे में बात की, तो ठेकेदार ने कहा—“हमें यह नहीं पता था कि यह जमीन निजी है, नगर पंचायत ने जहां बताया, हमने वहीं काम किया। ”इससे पहले 9 जून 2025 को भी उनकी भूमि पर मिट्टी डाली गई थी, जिसकी ऑनलाइन शिकायत संख्या 12153250125065 पर जांच में नायाब तहसीलदार ने स्पष्ट लिखा था कि गाटा संख्या 14 निजी भूमि है।इसके बावजूद 21 अक्टूबर 2025 को दोबारा बिना अनुमति नींव खुदाई कर दी गई।
पीड़िता का आरोप है— “यह प्लाट न तो रामलीला पार्क की भूमि में दर्ज है और न ही नगर पंचायत या ठेकेदार का इससे कोई संबंध है। इसके बावजूद मुझे परेशान किया जा रहा है। ”परवीन बेगम ने बताया कि वह अपनी बेटी की शादी के लिए इसी प्लाट को बेचकर खर्च पूरा करना चाहती थीं, लेकिन अब वह न्याय की तलाश में दर-दर भटक रही हैं।
उन्होंने चेतावनी दी है— “यदि मेरी भूमि से छेड़छाड़ की गई तो मैं आत्महत्या करने को मजबूर हो जाऊंगी। इसके लिए नगर पंचायत अध्यक्ष, ईओ और ठेकेदार जिम्मेदार होंगे।”मामला अब उच्च अधिकारियों तक पहुँच चुका है। यह देखना होगा कि पीड़िता को न्याय मिलता है या नहीं।
