रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

आदिवासी समाज में प्राचीन काल से चली आ रही पारंपरिक गाय गोहरी की परंपरा को जिले भर में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इसी कड़ी में मेघनगर के आज़ाद चौक पर भी गाय गोहरी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

दीपावली पर्व के बाद मनाया जाने वाला यह गाय गोहरी पर्व मन्नतधारी श्रद्धालुओं द्वारा अपनी मन्नतें पूरी करने की भावना से मनाया जाता है। पर्व के पूर्व ग्रामीण अपनी गायों और अन्य पशुओं को नहलाकर, रंग-रोगन कर और सजाकर उन्हें पूजा करते हैं।
ग्रामीण अपनी गायों और पशुओं को अपनी धन-संपत्ति मानते हैं। शाम होते ही अलग-अलग घरों की गायों को झुंड बनाकर युवकों द्वारा गाय गोहरी स्थल पर लाया जाता है, जहां पहले से ही भारी भीड़ मौजूद रहती है।
मन्नतधारी श्रद्धालु सड़क पर श्रद्धा भाव से लेटकर अपने ऊपर से गायों के झुंड के निकलने का इंतज़ार करते हैं।दूसरी ओर, कुछ ग्रामीण आतिशबाजी और पारंपरिक नारों के साथ झुंड को आगे बढ़ाते हैं, जिससे गायें मन्नतधारियों के ऊपर से गुजरती हैं।
आयोजक दल इस प्रक्रिया को दो से तीन बार दोहराते हैं। हर वर्ष यह अनोखी परंपरा झाबुआ जिले के विभिन्न स्थानों पर बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।
