मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

हाल ही में कुछ चार-पांच मोबिलाइजर्स द्वारा जिला पंचायत के खिलाफ यह शिकायत की गई थी कि केंद्र से बजट आने के बाद भी जिला पंचायत द्वारा समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस शिकायत को जिला प्रशासन ने बेबुनियाद और तथ्यों से रहित बताया है। जिला समन्वयक कमलेश टेकाम ने बताया कि जिले में अभी तक मोबिलाइजर्स की किसी भी प्रकार की राशि प्राप्त नहीं हुई है। केंद्र से केवल लिमिट पत्र भेजा गया है, जो जारी होने के चार दिन बाद खातों में प्रदर्शित हुआ। जिले से प्रक्रिया पूर्ण कर राज्य स्तर पर भेज दी गई है। राज्य स्तर से ही जनपद पंचायत बिछुआ, हर्रई, तामिया और जुन्नारदेव को राशि भुगतान हेतु जारी की जाएगी। केंद्र सरकार द्वारा एक नया “स्पर्श पोर्टल” तैयार किया गया है, जिससे राशि जारी करने में कुछ माह का विलंब हुआ है।
इसी कारण से पिछले पांच महीनों से पेसा जिला समन्वयक एवं पेसा ब्लॉक समन्वयकों का मानदेय भी भुगतान नहीं हो पाया है। कमलेश टेकाम ने बताया कि वे पिछले चार-पांच महीनों से राज्य स्तर के अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं और कई बार पत्र भी भेज चुके हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केंद्र से अभी बजट जारी नहीं हुआ है, और इसका कारण यह है कि मोबिलाइजर्स अपने मूल कार्यों का अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। केंद्र स्तर पर जब मोबिलाइजर्स के कार्यों का मूल्यांकन किया गया, तो उनका प्रदर्शन असंतोषजनक पाया गया। मोबिलाइजर्स का मुख्य कार्य शासन की योजनाओं एवं पेसा कानून का सही ढंग से जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन करना है, तथा ग्राम सभाओं को मजबूत बनाना और सदस्यों को उनके अधिकारों की जानकारी देना है।
लेकिन अभी तक पेसा कानून से न तो ग्रामीणों को कोई ठोस लाभ मिला है, न ही इसका प्रभावी क्रियान्वयन हुआ है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब कार्य ही नहीं हो रहा, तो मोबिलाइजर्स को वेतन किस आधार पर दिया जाए? कमलेश टेकाम ने यह भी कहा कि कुछ मोबिलाइजर्स, जो स्वयं या उनके परिवारजन राजनीति से जुड़े हैं (जैसे सरपंच या सरपंच पति), वे ही बार-बार बेबुनियाद शिकायतें करते रहते हैं और अन्य मोबिलाइजर्स को भड़काने का कार्य करते हैं।
पूर्व में भी जनपद पंचायत जुन्नारदेव के कुछ मोबिलाइजर्स ने यह शिकायत की थी कि उनसे बिना आदेश पत्र के कार्य कराया जाता है, जबकि हर कार्य राज्य कार्यालय से जारी पत्र के आधार पर ही कराया जाता है- जिसका पूरा प्रमाण जिला समन्वयक के पास मौजूद है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में असामाजिक तत्वों द्वारा बिना सबूत के झूठी शिकायतें की गईं और शासकीय कार्यों में बाधा डाली गई, तो ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।

