नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

पहलगाम में जाति नहीं “धर्म” पूछा जैसा जहरीला प्रचार करने वाले IT CELL ने चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया बी आर गवई पर हुए हमले को धर्म नहीं “जाति” देखी इस लाइन से रेखांकित नही किया। CJI पर जूता उछालने वाली मनुवादी सोच को जवाब देने का पहला मौका बिहार और दूसरा महाराष्ट्र को मिला है। नवंबर के अंत में महाराष्ट्र में महानगर पालिका नगर परिषद जिला परिषद पंचायत समिति के का आम चुनाव होंगे। राहुल गांधी ने देवेन्द्र फडणवीस सरकार पर वोट चोरी के आरोप साबित कर दिए है जिसके बाद जनता के बीच सरकार की कोई नैतिक साख नहीं बची है। राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिती गिरती जा रही है अब तो मंत्री खुले आम व्यापारियों को धमकी देते सुने जा रहे हैं।

दो भिन्न विचारधाराओं की लड़ाई में संविधान की महानता जनता के सामने स्पष्ट हो गई है भले ही विषमता को मानने वाली व्यवस्था संविधान को खारिज करती आई हो। जामनेर थाने का पुलिस प्रमुख एम एम कासार भगवा ध्वज वाहक बनकर एक धार्मिक जुलूस में शामिल होता है और पीछे दो सौ युवा नंगी तलवारे लहराकर भड़काऊ नारे लगाते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर घूम रहे इस वीडियो ने उन सेक्युलर हिंदुओं की आत्मा को झकझोर दिया है जो देश के आधुनिक निर्माण के बारे में सोचते हैं न कि राफेल को नींबू मिर्ची लगाने जैसी बकवास हरकत के बारे में। महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ बड़ा होने जा रहा है।
हवा का रुख देख कर भगवा परिवार के लोग पाला बदलकर MVA में और कांग्रेस के नेता भगवा परिवार में शामिल होने की कवायद में लगे हैं। समाज का लिखा-पढ़ा, अनपढ़ लेकिन समझदार नागरिक आज विपक्ष से यह पूछ रहा है कि विपक्ष निकाय के आम चुनाव केवल धर्म निरपेक्ष विचार के साथ लड़ेगा या नहीं। महाराष्ट्र के इतिहास में रूढ़िवादी विचारों को प्रासंगिक बनाने में प्रगतिशील सोच ने ठीक उसी तरह से मदद करी है जिस तरह से 1967 , 1977 में समाजवादियों ने की थी।
