देवेन्द्र फडणवीस सरकार का दोगलापन : बिजली के रेट में पहले कटौती फ़िर बढ़ोतरी | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

देवेन्द्र फडणवीस सरकार का दोगलापन : बिजली के रेट में पहले कटौती फ़िर बढ़ोतरी | New India Times

सरकार की सूचना के बाद बिजली नियामक आयोग द्वारा कम किए गए बिजली के दर तीन महीने बाद अचानक से बढ़ा दिए गए हैं। 0 से 500 यूनिट उपयोग किए जाने पर उपभोक्ताओं को अब 50 पैसे से 1 रुपया प्रती यूनिट ज्यादा देना पड़ेगा। बोर्ड ने बताया है कि बिजली की बढ़ती मांग के कारण खुले बाजार से बिजली खरीदना पड़ रही है। 1 जुलाई को लागू किया गया रेट की कटौती का निर्णय सरकार द्वारा रद्द किया गया है। बीजेपी शासित सरकारें 2014 से लगातार बिजली महंगी करती जा रही है। सरकार की आड में एक पार्टी को आर्थिक रूप से मजबूत कर पूंजीवाद को शक्तिशाली बनाने वाली सोच ने देश में आर्थिक असमानता को चरम पर ला कर रख दिया है।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर के विरोध को कम करने के लिए फडणवीस सरकार ने बिजली के रेट मे कटौती का निर्णय लिया था ? निकाय चुनावो के बाद जबरन स्मार्ट मीटर लगवाने की योजना पर विचार किया जा रहा है ? कॉरपोरेट के चंदे से सत्ता , सत्ता से धंधा और धंधे से हज़ारों करोड़ की दौलत इकठ्ठा करने वाले नेता और नेताओं द्वारा खरीदे हुए कार्यकर्ता इस प्रकार से देश को हांका जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की अप्रियता और महंगाई के ग्राफ के बीच प्रतियोगिता जारी है। आम लोग धर्म की राजनीति का अधर्मी खेल समझ चुके हैं। सरकार विधानसभा विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष नही चाहती है। निकाय चुनावो में अपनी बादशाहत कायम रखने के लिए पंख कटे गब्बर सिंह खुले आम टैक्स पेयर्स को धमकियां दे रहे हैं।  बिजली के बढ़ते दरों का सिलसिला ऐसे हि जारी रहा तो सरकार का भविष्य अंधेरे में जाते देर नहीं लगेगी।

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