खाली आक्सीजन सिलेंडर लगाने से मासूम बच्चे की मौत;  हरदा जिला चिकित्सालय के अस्पताल अमले की कारस्तानी | New India Times

जितेंद्र वर्मा, हरदा ( मध्यप्रदेश ), NIT; ​खाली आक्सीजन सिलेंडर लगाने से मासूम बच्चे की मौत;  हरदा जिला चिकित्सालय के अस्पताल अमले की कारस्तानी | New India Timesमध्यप्रदेश के हरदा जिले में सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही से एक छोटा सा मासूम बच्चा अपनी माँ की आँखों से दूर हो गया।आरोप है कि आक्सीजन का खाली सिलेंडर लगाने से अस्पताल में भर्ती तीन महीने के बच्चे की मौत हो गई है।

मिली जानकारी के मुताबिक यह मामला हरदा जिला चिकित्सालय में पेश आया है। अस्पताल  में लगातार हो रही ऐसी लापरवाही जिसे आप सुन और देख कर अपना आपा को देंगे। यहां डॉक्टर से लेकर स्टॉफ तक की लापरवाही कम नहीं हो रही है। इसका खामियाजा शुक्रवार को एक मासूम की मौत के रूप में सामने आया है। खाली सिलेंडर से ही मासूम को ऑक्सीजन देने का ढोंग किया जा रहा था, जिसमें बच्चे ने दम तोड़ दिया। परिजनों द्वारा जब स्टॉफ पर लापरवाही का आरोप लगाया तो आनन-फानन में शाम साढ़े 6 बजे प्रबंधन ने खाली सिलेंडरों की जगह भरे सिलेंडर लगा दिए। बच्चे की मौत होते ही उसकी मां बेहोश हो गई, जो समाचार लिखे जाने तक होश में नहीं आ पाई है। डॉक्टरों द्वारा उसका इलाज किया जा रहा है। शहर के वार्ड २८ महारानी लक्ष्मीबाई वार्ड की शकूर कॉलोनी में रहने वाले आशीष सोनी का तीन महीने का बेटे केशव को बुखार, निमोनिया हो गया था। ​खाली आक्सीजन सिलेंडर लगाने से मासूम बच्चे की मौत;  हरदा जिला चिकित्सालय के अस्पताल अमले की कारस्तानी | New India Timesसुबह 11 बजे उसे जिला अस्पताल में लाया गया था। डॉक्टर ने उसे आईसीयू में भर्ती किया गया था। कमरे में लगी नली के जरिए बच्चे को ऑक्सीजन दिया जा रहा था, लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिलने से बच्चे की तबियत बिगड़ रही थी। जिस पर उसकी बुआ अंजू द्वारा स्टॉफ नर्स को बताया गया, किंतु वे ऑक्सीज होने का हवाला देते रहे। इसके बाद सिलेंडर की जांच की गई तो वह खाली मिला। दोपहर साढ़े 3 बजे तक बच्चे को इंजेक्शन भी नहीं लगाए गए। वहीं शाम तक एक भी डॉक्टर बच्चे को देखने के लिए नहीं आया। शाम साढ़े 5 बजे बच्चे ने ऑक्सीजन के अभाव में दम तोड़ दिया। परिजनों ने डॉक्टर, स्टॉफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया तो दो डॉक्टरों ने आकर जांच की औपचारिकता निभाई। डॉक्टरों द्वारा बच्चे की मौत की पुष्टि करते ही उसकी मां मनीषा सोनी के आंखों से आंसू थम नहीं रहे। रोते-रोते वह बेहोश हो गई है। उसे होश में लाने के प्रयास किए गए लेकिन बेहोशी की हालत में भी भय्यू कैसा होने के बारे में पूछ रही है। इस समय उस माँ बाप व परिवार पर क्या बीत रही होगी आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते लेकिन लापरवाह डॉक्टरों को ऐसीं घटनाओ से कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि उन लोगों के लिए यह रोज का काम है। सिर्फ बीतती है तो सिर्फ परिवार या माता पिता को जब अपना कोई इस तरह की घटना का शिकार हो बैठता है। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. एसके सेंगर ने बताया की बच्चे के दिल में छेद था। इस बीमारी की वजह से उसकी मौत हुई है। ऑक्सीजन खत्म होने के कारण मौत होने वाली बात गलत है।

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