मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है – इसी भावना को चरितार्थ करते हुए शहर के कुछ सेवाभावी व्यक्तियों ने ऐसे कार्य किए हैं जिन्हें करना हर किसी के लिए संभव नहीं है। कोरोना काल के खौफ़नाक समय में, जब लोग अपने घरों से बाहर निकलने तक से डर रहे थे, उस कठिन दौर में भी कुछ समाजसेवियों ने निःस्वार्थ भाव से मृतकों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई।
नबु भाई और गौतम वानखेड़े ने राजा हरिश्चंद्र घाट एवं सत्यारा घाट पर लगातार असहाय एवं लावारिस मृतकों के अंतिम संस्कार का कार्य किया। वहीं,रवि सोनवणे ने नागझिरी घाट पर यह सेवा निस्वार्थ भाव से निभाई। इन सेवाभावी व्यक्तियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना मृतकों को पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार देकर मानवता की सच्ची मिसाल प्रस्तुत की। इनके जीवन का अधिकतर समय यही सेवा कार्यों में व्यतीत होता है। न केवल मृतकों का अंतिम संस्कार, बल्कि इन घाटों की स्वच्छता और वहां आने वाले लोगों की मदद भी यह दोनों निःशुल्क करते हैं।
समाजसेवा को ही अपने जीवन का उद्देश्य मानते हुए, लाखों की आबादी वाले इस शहर में, जहाँ अधिकांश लोग अपने-अपने कार्यों में व्यस्त हैं, वहीं इन नागरिकों ने एक अलग राह चुनी है – और वह है मानवता की सेवा। इसी अमूल्य सेवाभाव को देखते हुए ताप्ती सेवा समिति, बुरहानपुर ने इन समाजसेवियों को सम्मान पत्र और शॉल-श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया। समिति अध्यक्ष सरिता राजेश भगत ने कहा: ऐसे सेवाभावी कार्यकर्ताओं का सम्मान करना ही उनके योगदान के प्रति सच्ची कृतज्ञता है।
यह सम्मान समारोह समाज के लिए प्रेरणादायी पहल है और आने वाली पीढ़ियों को भी निस्वार्थ सेवा के लिए प्रेरित करेगा।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोपाल भाई जड़िया एवं इस अवसर पर अध्यक्ष श्रीमती सरिता राजेश भगत, आशा तिवारी, संरक्षक राजीव खेड़कर, वरिष्ठ मार्गदर्शक मंसूर सेवक, पुनीत साकले,अजय राठौर राजकुमार बचवानी, एडवोकेट भूपेंद्र जूनागढ़े,हेमंत भाई एरंडोल वाले, विजय राठौड़,बसंत पाल आदि लोग मौजूद थे। कई वर्ष पूर्व 07 जून के मुमताज़ महल फेस्टिवल में शहज़ादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी ने भी इस प्रकार की पहल करते हुए श्मशान और क़ब्रिस्तानों की सेवाओं से जुड़े बंधुओं का स्वागत व सम्मान कर चुके हैं। ताप्ती सेवा समिति बुरहानपुर ने भी सराहनीय, स्वागत योग्य पहल की है।

