नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

मैं धोबी मैं ओबीसी, मैं मनियार मैं ओबीसी, मैं माली ओबीसी, मैं तेली मैं ओबीसी, इस तरह से जातिसूचक तख्तीयां पकड़कर सडक पर उतरे आंदोलनकारियों ने मराठा समुदाय को ओबीसी में लाने के सरकार के निर्णय का विरोध किया है। जामनेर में अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद के बैनर के नीचे महेंद्र बाविस्कर, विनोद माली, मूसा पिंजारी, अशोक नेरकर, ऱफ़िक मौलाना, श्रीराम महाजन, बाबूराव घोंग़डे समेत अन्य ने देवेन्द्र फडणवीस सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की। सरकार मनोज जरांगे की बातें क्यों मान रही है, विदर्भ खानदेश का मराठा समाज पहले से ओबीसी मे शामिल है ऐसे में हैदराबाद गैजेट के हवाले से मराठों को ओबीसी मे शामिल क्यों किया जा रहा है? हैदराबाद गैजेट लागू करने वाला सरकारी आदेश रद्द किया जाए। इसके पहले वंशबेल दस्तावेजों के आधार पर जिन मराठों को बतौर कुनबी ओबीसी प्रमाणपत्र बांटे गए हैं सरकार उन दाखिलों को वापिस ले, ऐसी मांग की गई है।
50% मर्यादा और गिनती पर चुप्पी

महाराष्ट्र में बीते तीन दशकों से मराठा आरक्षण को लेकर मराठा कुनबी समुदाय के आंदोलन जारी हैं। भारत का संविधान शूद्र अति शूद्रों को सामाजिक न्याय की भावना पर आरक्षण का अधिकार प्रदान करता है। ओबीसी को आरक्षण देने वाले मंडल आयोग के ख़िलाफ़ कमंडल यात्रा निकालने वालों का समर्थन करने वाले आज मंडल के समर्थन में देखे जा सकते हैं। भारत में जातिगत जनगणना के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारीत आरक्षण की 50% की मर्यादा को ख़त्म किए बिना सामाजिक न्याय स्थापित नहीं हो सकता। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा किए गए उक्त दोनों संकल्पों को लेकर देश की जनता आश्वस्त है तो वहीं आंदोलक खामोश हैं।
