नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

कांग्रेस नेता बाल गंगाधर तिलक द्वारा शुरू किया गया गणेश फेस्टिवल 79 साल बाद महाराष्ट्र का राज्य उत्सव घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने इस बात की घोषणा की है। जिसके बाद 2014 से बीजेपी सरकार द्वारा बंद कर दी गई शांति कमेटियों को पुलिस प्रशासन ने फिर से जिंदा कर दिया है। संविधान प्रेमी भारतीय समाज यह मांग कर रहा है कि सरकार सांप्रदायिक एकता को मजबूती देने वाले सभी सरकारी कार्यक्रम उपक्रमों को शुरू करवाए। कोरोना के समय मोदी सरकार द्वारा बिना तैयारी अचानक पूरे देश में लगाए लॉक डाउन के दौरान महाराष्ट्र में बीजेपी ने उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ मंदिर खोलो जैसे आंदोलन कर अपने धार्मिक पॉलिटिक्स का एजेंडा चमकाया।
गणेश स्थापना को राज्य उत्सव घोषित करने से पहले महाराष्ट्र सरकार ने जमीनी स्तर पर किसी किस्म की तैयारियों का जायजा नहीं लिया है। विकास के नाम पर प्रदेश में बुना हुआ सीमेंट कांक्रीट का आधा अधूरा जाल शहरों में भयंकर अव्यवस्था पैदा कर रहा है। ट्रैफिक की समस्या का काट आज तक खोजा नहीं जा सका है। तिराहे चौराहे नुक्कड़ पर नेताओं की ओर से धार्मिक दिखने के लिए किए जाने वाले मां गंगा ने बुलाया टाइप वाले अभिनय से जनता अब ऊब चुकी है।
सरकार में शामिल मंत्रियों के गृह निर्वाचनों में विकास की हालत बदतर है। दशकों बाद बना जलगांव का रिंग रोड CM के दौरे की प्रतिक्षा में है। तीन एकड़ जमीन के टुकड़े के कारण अधर में लटका जामनेर का बायपास शायद कभी मुकम्मल हो पाएगा। बिहार में चल रही राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के मंचों से देश विदेश में वोट चोरी का साबित उदाहरण बन चुके देवेन्द्र फडणवीस शायद अपनी महायुति सरकार का पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाए।
