धार का रतन बिजनेस हब घिरा विवादों में,फर्जी शपथपत्र का हुआ खुलासा, शिकायतकर्ता पहुँचा राष्ट्रपति तक | New India Times

ममता गनवानी, धार/भोपाल (मप्र), NIT:

मध्यप्रदेश के धार जिला मुख्यालय पर शहर के बीच विकसित हो रहे रतन बिजनेस हब में एक नया मोड़ सामने आया है। शासन द्वारा बेची गई डिपो परिसर की जमीन जहाँ अब रतन बिजनेस हब आकार ले रहा है। वही इस बिजनेस हब को जिला धार कलेक्टर न्यायालय से दी गई विकास अनुमति में प्रस्तुत शपथपत्र के मिथ्या होने की बात को लेकर राष्ट्रपति तक की गई शिकायत के बाद मामले की गंभीरता से हुई जाँच पूर्ण हो चुकी है। जिसके जाँच प्रतिवेदन ओर अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ शिकायत कर्ता संदीप शर्मा ने पत्रकार वार्ता की। आपको बता दे गुरकीरत रियल स्टेट के इस प्रोजेक्ट को लेकर दी गई विकास अनुमति में कलेक्टर न्यायालय को गुमराह करने की बात को लेकर शिकायत संदीप शर्मा के द्वारा दिसंबर 2024 में की गई थी। कलेक्टर न्यायालय में  गुरकीरत रियल स्टेट के द्वारा अनुमति के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों को सूचना के अधिकार में प्राप्त करने के बाद शिकायतकर्ता ने शपथपत्र में आपराधिक मामले कलेक्टर न्यायालय से छुपाने की शिकायत करते हुए जाँच की मांग की थी। साथ ही कलेक्टर न्यायालय द्वारा दी विकास अनुमति निरस्त कर एफआईआर की मांग भारत की राष्ट्रपति ओर मध्यप्रदेश के राज्यपाल के साथ मुख्यमंत्री और अन्य प्रशासनिक कार्यालयो के साथ धार कलेक्टर से की गई थी। मामले में जाँच पूर्ण हो चुकी है अब सिर्फ कार्यवाही लिखे जाने का इंतजार है जिसको लेकर शिकायत कर्ता संदीप शर्मा ने एक बार फिर भारत की माननीय राष्ट्रपति से कार्यवाही की गुहार लगा दी है।

धार का रतन बिजनेस हब घिरा विवादों में,फर्जी शपथपत्र का हुआ खुलासा, शिकायतकर्ता पहुँचा राष्ट्रपति तक | New India Times


गुरकीरत रियल स्टेट के प्रोजेक्ट रतन बिजनेस हब को कलेक्टर न्यायालय बोर्ड से मिली विकास की अनुमति पर सवाल खड़े करते हुए शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार के कागज के हवाले से शिकायत में इस बात का उल्लेख किया है कि गुरकीरत रियल स्टेट के मालिक रमनवीर सिंह अरोरा द्वारा कलेक्टर न्यायालय से विकास की अनुमति लेने के दौरान गुमराह किया गया है। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया है की गुरकीरत रियल स्टेट की और से रमनवीर सिंह अरोरा द्वारा आवेदन प्रस्तुत करने के बाद जो शपथपत्र न्यायालय कलेक्टर के समक्ष पेश किया गया है उसमें मिथ्या जानकारी दी गई है।

जिसे प्रमाणित करने के लिए भी शिकायतकर्ता ने प्रचलित जाँच के दौरान कथन स्वरूप दस्तावेज भी पत्र के माध्यम से जाँच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए थे। मामले को लेकर जाँच अधिकारी निष्पक्ष जाँच के लिए सम्पूर्ण मामले की बारीकियों को समझते हुए गुरकीरत रियल स्टेट के मालिक रमनवीर सिंह अरोरा से भी पत्र व्यवहार कर जवाब तलब किया गया था जिसमे गुरकीरत रियल स्टेट की ओर से अपने कथन में बताया गया कि विकास अनुमति में प्रस्तुत शपथपत्र के संसोधन में संसोधित शपथपत्र प्रस्तुत किया है। जाँच अधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में आगामी कार्यवाही के लिए प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए जो तथ्य लिखे है और शिकायत कर्ता ने पत्रकारवार्ता में जो प्रमाणित दस्तावेज पत्रकारों के समक्ष उपलब्ध कराए उनसे एक बात तो स्प्ष्ट हो जाती कि वाकई गुरकीरत रियल स्टेट की विकास अनुमति में जिस शपथपत्र पर विकास अनुमति हुई है उसमें आपराधिक रिकार्ड कलेक्टर न्यायालय से छुपाया गया है। रही बात संसोधित शपथ पत्र प्रस्तुत करने की तो यह बात भी स्प्ष्ट हुई कि संसोधित शपथपत्र प्रस्तुत करने के पहले ही विकास अनुमति कलेक्टर न्यायालय से जारी की जा चुकी थी।

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