अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:
इजराईल द्वारा फिलिस्तीन में जारी नरसंहार एवं गज़ा के हजारों बच्चों को भूख से मार डालने वाली निर्मम कार्यवाहियों के खिलाफ भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर कई संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया।6 अगस्त 1945 को अमरीका द्वारा जापान के हिरोशिमा पर बम गिराकर लाखों बेगुनाहों की जान ले ली गई थी, उसी की याद में साम्राज्यवादी आतंक के खिलाफ पूरी दुनिया इसे हिरोशिमा दिवस के तौर पर मनाती है।

आज फिलिस्तीन का गज़ा का इलाका हिरोशिमा बना हुआ है। जिसमें अमरीका के बेशर्म सहयोग से इजराइल की नेतनयाहू की सरकार निर्मम अत्याचार कर रही है। यह साम्राज्चवादी मंसूबों का नया रूप है। केवल हथियारों के हमलों से ही नहीं वरन् राहत सामग्री रोककर,अस्पतालों को नेस्तनाबूत कर, डाॅक्टरों को गिरफ्तार कर फिलिस्तीन की जनता पर अमानवीय जुल्म ढाये जा रहे हैं। एक नकली राहत संगठन बनाकर अमरीका और इजराइल उस संगठन से राहत सामग्री लेने आये बच्चों पर बमबारी करके उन्हे मार डालने से नहीं कतरा रहे हैं। पूरी दुनियां में इस नरसंहार के खिलाफ और नेतनयाहू और अमरीका के गठजोड के खिलाफ आवाज उठ रही है। खुद इजराईल में भी जनता नेतनयाहू सरकार के विरोध में उठ खडी हो रही है। लेकिन भारत सरकार अमरीका की पिठ्ठू बन कर इजराईल का समर्थन कर रही है। फिलिस्तीन की जनता के साथ हमारी एकजुटता की बरसों पुरानी मानवीय और न्यायिक विदेश नीति बदल दी गयी है। इसके खिलाफ भारत की जनता को आवाज उठानी होगी।
इन्ही भावनाओं और आवाजों को आज के प्रदर्शन में व्यक्त किया गया। गजा के भूखे बच्चों के पोस्टर और अमरीकी ओर इजराईल के नापाक गठजोड का विरोध करने वाले नारे लिखे पोस्टरों के साथ संगठनों ने यह प्रदर्शन किया। भारत ज्ञान विज्ञान समिति की आशा मिश्रा, राकेश, खुशबू केवट, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की संध्या शैली, नीना शर्मा,अरूणा, विजया ठाकुर, रीता दोहरे, उर्मिला, कुशवाहा, विद्या, रेखा, मीनल, किरण और बबीता शर्मा, मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून,जनवादी लेखक संघ के मनोज कुलकर्णी, कार्टूनिस्ट बालेंद्र कुमार परसाई, सामाजिक कार्यकर्त्ता योगेश दीवान, यमुना, लेखिका और कवि डाॅ आरती, संध्या कुलकर्णी, प्रतिभा गोटीवाल, प्रगतिशील लेखक संघ के शैलेंद्र शैली और प्रज्ञा रावत, सीटू के रामविलास गोस्वामी और एस एफ आई के दीपक पासवान के साथ अन्य कई सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों ने इस प्रदर्शन मे हिस्सेदारी की।
