झाबुआ के छात्रों ने वीर सैनिकों को लिखे प्रेरणादायक पत्र, राष्ट्रभक्ति और स्वच्छता का दिया संदेश | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

झाबुआ के छात्रों ने वीर सैनिकों को लिखे प्रेरणादायक पत्र, राष्ट्रभक्ति और स्वच्छता का दिया संदेश | New India Times

स्वतंत्रता दिवस 2025 के उपलक्ष्य में “हर घर तिरंगा-हर घर स्वच्छता: स्वतंत्रता का उत्सव, स्वच्छता के संग” अभियान के अंतर्गत झाबुआ जिले के शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं द्वारा देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे वीर जवानों को पत्र लेखन के माध्यम से सम्मान प्रकट किया गया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में राष्ट्रभक्ति, सैन्य बलों के प्रति सम्मान, तथा स्वच्छता जैसे सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा। विद्यार्थियों ने अपने पत्रों में वीर सैनिकों के परिश्रम, त्याग और बलिदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए उन्हें यह संदेश भी दिया कि देश के नागरिक विशेषकर युवा पीढ़ी स्वच्छ और सशक्त भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा रही है।

झाबुआ के छात्रों ने वीर सैनिकों को लिखे प्रेरणादायक पत्र, राष्ट्रभक्ति और स्वच्छता का दिया संदेश | New India Times

पत्र लेखन गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी भावनाओं को सुंदर शब्दों में पिरोया। इन पत्रों में कहीं मातृभूमि के लिए प्रेम झलकता है, तो कहीं सैनिकों के साहस और समर्पण के लिए सच्ची कृतज्ञता। साथ ही, कई बच्चों ने अपने पत्रों में यह भी उल्लेख किया कि वे स्वच्छता को अपनाकर और दूसरों को इसके लिए प्रेरित कर एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में अग्रसर हैं।

झाबुआ के छात्रों ने वीर सैनिकों को लिखे प्रेरणादायक पत्र, राष्ट्रभक्ति और स्वच्छता का दिया संदेश | New India Times

कलेक्टर नेहा मीना ने इस रचनात्मक पहल की सराहना करते हुए कहा कि, “यह अभियान केवल राष्ट्रभक्ति का उत्सव नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक के रूप में गढ़ने का माध्यम भी है। सैनिकों के नाम लिखे गए इन पत्रों में देश के भविष्य की उज्ज्वल झलक दिखाई देती है।

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इस अवसर पर जिले के  जनजातीय कार्य विभाग अधिकारियों, प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों की इस पहल को प्रोत्साहित किया और इसे एक प्रेरक शिक्षण गतिविधि बताया, जिससे न केवल छात्रों की रचनात्मकता को बल मिला, बल्कि उनमें देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हुई।

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