नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

दिल्ली से लेकर मुंबई अखंड भारत पर बीजेपी ने प्रचंड कर्जा कर रखा है। महाराष्ट्र की देवेन्द्र फडणवीस सरकार की तिज़ोरी में मंत्रालयों के विभागों के लिए बजट का पैसा नहीं है। तिज़ोरी भरने के लिए सरकार ने जनता से तरह तरह के बकाया टैक्स वसूलने के साथ साथ मनमाने तरीके से लुट करना शुरू कर दिया है। लुट का एक हथियार है स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर जो ग्राहकों से तीन गुना बिल वसूल रहा है। सदन में सीएम ने स्मार्ट मीटर को लेकर जो बोला उसके ठीक उलट सूबे में हो रहा है। लोगों के घरों पर जबरदस्ती स्मार्ट मीटर चिपकाए जा रहे हैं।

1 जुलाई से घरेलू बिजली उपभोग के दाम कम करने के सरकार के निर्णय की चालबाजी उजागर हो चुकी है। 0 से 100 यूनिट उपभोग के लिए एक मात्र रुपया कम किया है। डिजिटल मीटर और स्मार्ट मीटर के रीडिंग में तीन गुना का फ़र्क है। एक रुपया कटौती का लाभ होने के बजाय ग्राहकों को हर महीने हजारों रुपए की चोट लग रही है। जनता की असहमति कुचली जा रही है गोदी मीडिया ने विपक्ष को गायब कर दिया है।

स्मार्ट मीटर से त्रस्त मिडल क्लास 2 से 5 लाख रुपए खर्च कर अपने घरों के ऊपर सोलर सिस्टम बिठा रहा है सोलर का सारा साम्राज्य गौतम अडानी के नियंत्रण में है। सोलर की लिंक न्यूयॉर्क की अदालत में अडानी पर चल रहे फ्रॉड के मुकदमें से जुड़ी है। बिजली क्षेत्र में चल रहे गड़बड़झाले को लेकर देवेन्द्र फडणवीस सरकार को अपनी भूमिका साफ़ कर देनी चाहिए। मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ दिल्ली से सोशल मीडिया पर आ रही खबरें सरकारी बिजली क्षेत्र के “अडानीकरण” की भयावहता को दर्शा रही है।
