शेरा मिश्रा/अविनाश द्विवेदी, कटनी (मप्र), NIT;
कैमोर थाना अंतर्गत हरैया निवासी की कैमोर एसीसी प्लांट में मौत हो गई, जिसकी सही जानकारी न देने पर मृतक के परिजनों ने एसीसी के गेट पर लाश रख कर विरोध विरोध प्रदर्शन किया।
कैमोर में एसीसी सीमेंट प्लांट मौत का जरिया बनता जा रहा है। आए दिन घटनाएं और मौत का तांडव देखने को मिल रहा है। मृतक राम चरण लोधी पिता चंदीदिन लोधी हरैया निवासी उम्र 55 वर्ष रायमिल आपरेटर (किलन) में पर्मानेंट कर्मचारी था। 25 /12/2017 को एसीसी में काम करने आया तो लेकिन वापस नहीं लौटा। जब रामचरण लोधी अपने घर शाम को नहीं पहुंचा तो परिजनों की चिंता बढी और परिजनों ने फोन सम्पर्क करना चाहा किन्तु कोई जानकारी नहीं मिली। देर रात अचानक एसीसी मैनेजमेंट के एचआर द्वारा सूचना दी गई की रामचरण लोधी कटनी एमजीएम अस्पताल में एडमिट है। परिजन घबराते हुए कटनी पहुंचे तब तक एमजीएम से उसे जबलपुर अस्पताल रिफर कर दिया गया। जब तक परिजन कुछ समझ पाते तब तक रामचरण लोधी को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिवार के लोगों को मौत की सही जानकारी नहीँ दी गई और डाक्टर व एसीसी मैनेजमेंट के अधिकारीयों की मिली भगत से रामचरण को मृत घोषित किया गया, यह आरोप परिजनों ने एसीसी सीमेंट प्लांट के ऊपर लगाते हुए एसीसी के मुख्य गेट पर मृत रामचरण की लाश को रख कर विरोध प्रदर्शन किया। परिवारीक प्रदर्शनकारियों को डराने धमकाने के लिए एसीसी मैनेजमेंट ने भारी पुलिस बल तथा यूनियन के नेता, कम्पनी मैनेजमेंट के ठेकेदार आदि को एकत्र कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया किन्तु परिजन गेट से हटने को जब तैयार नहीं हुए तो परिजनों को बीस लाख रुपये अपनी गलती स्वीकार करते हुए एसीसी के अधिकारीयों द्वारा देने का आश्वासन दिया गया तथा अफरातफरी मे बीस हजार की नगद राशि भी परिजनों को देकर मुह बंद करा दिया गया। मौके पर पुलिस इस कदर तैनात कराई गई जैसे कोई आतंकवादी गेट पर आ गए हों। पुलिस के हाथों मे हथियार दिखाकर परिजनों को डराने धमकाने का कार्य किया गया इससे परिजन डर से एसीसी से समझौता करने को मजबूर हो गए। 
एसीसी के सुरक्षा गार्डो ने कानून अपने हाथों में लिया
रामचरण की मौत पर मृतक जब एसीसी गेट पर विरोध जता रहे थे, उस वक्त एसीसी सुरक्षा अधिकारी विकृम सिंह एंव सुजित तिवारी ने परिजनों पर अपनी शक्ति दिखाने का प्रयास किया तथा कानून को अपने हाथों में लेते हुए धक्का मुक्की भी की, मामला विवादित होता तभी हथियारों से लेस पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को चारो तरफ से घेर कर परिजनों को डरा दिया। पुलिस का रौद्र रूप देखकर ऐसा लग रहा था कि एसीसी गेट पर कोई आतंकवादी घुसे हैं। हालांकि इस खौफनाक मंजर को देखकर परिजनों ने डर कर एसीसी मैनेजमेंट से समझौता कर लिया जिसमें बीस लाख का मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया तथा बीस हजार रुपये नगद भी दिए गए।
