शेरा मिश्रा/अविनाश द्विवेदी, कटनी (मप्र), NIT;
मप्र कटनी जिला के कैमोर एसीसी सीमेंट प्लांट की वजह से आसपास के क्षेत्रों में जन जीवन अस्तव्यस्त दिख रहा है। यहां प्रदूषण से नगर के लोगों का जीवन दुश्वार हो गया है, लेकिन कटनी जिला प्रशासन मूक दर्शक नजर आ रहा है।
कैमोर बडारी मे एसीसी सीमेंट प्लांट के कन्वेयर बेल्ट की बजह से आम नागरिकों को टीबी जैसी जान लेवा बीमारियाँ हो रही हैं। इस बीमारी की वजह से लोगों की जानें जा रही हैं, लेकिन कटनी जिला के आला अधिकारी न कोई ठोस कदम उठा रहे हैं और न ही निचले स्तर के अधिकारियों को कार्यवाही के निर्देश दे रहे हैं। आम जनता एसीसी की वजह से अस्तव्यस्त है। प्रदूषण की वजह से कैमोर क्षेत्र के हर नागरिक बीमारियों से ग्रसित होने के खतरे से आशंकित है। जबकि मध्यप्रदेश शासन ने एसीसी को कन्वेयर बेल्ट लगाने की अनुमति नही दी थी।
एसीसी के पास रोप की अनुमति है, इस जानकारी ओपन होने के बाद कटनी जिला प्रशासन एसीसी पर अपना दबदबा कस कर मामले को दबाने में लिप्त है। वही जन प्रतिनिधि भी इस मामले को लेकर एसीसी से अनेकों कार्य हथियाने मे लगे हुए हैं। जबकि अगर निमय की बात करें तो एसीसी सीमेंट प्लांट अनेकों नियम विरुद्ध कार्य कर रही है। जिससे कैमोर रहवासियों का जीना दुश्वार है। नियम विरुद्ध चार की जगह छै चिमनी लगा कर प्रदूषण फैलाया जा रहा है। कन्वेयर बेल्ट की जगह रोप लगा कर खुले कन्वेयर बेल्ट से प्रदूषण उडा या जा रहा है। जिसकी चपेट में अनेकों गांव आ रहे हैं। शासकीय डॉक्टरी रिपोर्ट के अनुसार बम्हनगवां, मोहनटोला, बडारी, अमुआरी, खरखरी, महगांव, खलवारा गांव कैमोर आदि गावों मे टीबी के अधिक मरीज हैं, जिसकी बजह प्रदूषण है। दो वर्ष के अंतराल में लगभग 70 लोगों की मौत भी हुई। जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते कैमोर का हर नागरिक असुरक्षित है। आरोप लगाया जा रहा है कि जिला प्रशासन अपने मुनाफे के लिए मध्यप्रदेश की कानून व्यवस्था को दागदार कर रहा है।
कटनी जिला प्रशासन की प्रथम जबाबदारी जन मानस की सुरक्षा होनी चाहिए, लेकिन इस क्षेत्र में लोगों की मौत का तांडव कटनी जिला प्रशासन देख रहा है। कार्यवाही के नाम पर एसीसी मैनेठ रहा है। जिला प्रशासन की इस घिनौनी हरकत के चलते स्थानीय जन मानस में अच्छा खासा रोस व्याप्त है। एसीसी मैनेजमेंट से प्रशासनिक अधिकारी तो फल फूल रहे हैं किन्तु इसका खामियाजा भाजपा को भोगना पड सकता है जनता जनार्दन का मानना है कि सत्ता पक्ष अधिकारीयों को ढिल दे रहे है जिससे कोई भी अधिकारी एसीसी के खिलाफ कार्यवाही करने मे अग्रसर नहीं होते हैं। भाजपा के राज मे एसीसी मैनेजमेंट मन मौजी कार्य कर रही है। कांग्रेस के समय काल में इतनी भष्टता नही थी एसीसी मैनेजमेंट न जनप्रतिनिधियों का डर और नही प्रशासनिक कार्यवाही का भैय। इन्ही सभी की वजह से आए दिन लोग प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं
