रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

आज ईद-उल-अजहा का दिन है सुबह से ही बच्चे बड़े सभी ईद की नमाज़ अदा करने के लिए ईदगाह पर खुशी-खुशी पहुंचे। ईदगाह पर मौलाना जनाब अम्मार सहाब ने नमाज़ अदा करवाई व मुल्क में अमन चैन व खुश हाली की दुआं मांगी फिर मौलाना जनाब अम्मार साहब ने खुत्बा सुनाया व सभी ने खामोशी के साथ खुत्बा सुकुन से सुना उसके बाद सभी ने एक दुसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।

मौलाना जनाब हाफिज रिजवान साहब ने ईदगाह पर अपने बयान में इब्राहिम अलेहिस्लाम व इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी की तफसील बयान की अल्लाह के हुक्म के मुताबिक इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने इस्माईल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी दी पर अल्लाह की करनी थी कि वो कुर्बानी एक भेंड़े पर उतरी अब जब भी कोई इस तरह से कुर्बानी देगा तो गोया उसे अपनी औलाद की दी हुई कुर्बानी का सवाब मिलेगा। आगे फरमाया कि कुर्बानी कर देना खाली कुर्बानी देना ही नहीं बल्कि अपने मुल्क के साथ वफ़ादारी, पड़ोसी का हक, बेटे व बेटी का हक, भाई बहन का हक, दोस्तों का हक आदि भी कुर्बानी देने जैसा है इस तरह की हक का देना भी कुर्बानी है।

बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ पर भी मौलाना ने समझाया
मौलाना जनाब रिजवान साहब ने बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ पर भी मौलाना ने बताया की डेढ़ हजार साल पहले हुजूर सल्ललाहो ने फरमाया कि जो भी बेटी की तरबियत करे पढ़ाई कराए और शादी की उमर के बाद निकाह कराए अल्लाह उसके माँ बाप को जन्नत अता करेगा। इस फजीलत को देखते हुए भी बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ पर भी मौलाना ने समझाया।
हाफ़िज़ मोहसिन पटेल सहाब ने फरमाया कि आलमे अरवाह में खुदा से जो वादा लिया उस वादा वफाई को करना ही बंदगी है अपने बयान में फरमाया की आलमे अरवाह में खुदा ने हमसे कहा क्या तुम मेरी ही ईबादत करोगे मेरे हुक्म बजा लाओगे तो हमने वादा किया कि जी रब्बुल आलमीन हम तेरी ही इबादत करेगे ओर तुझ ही को अपना रब मानेंगे तेरे हुक्म को बजा लाएँगे। मौलाना ने आगे फारमाया की हमे इत्तफाक व इत्तहाद के साथ रहना तुम एक जिस्म की तरह हो जैसे जिस्म का एक जिस्म की तरह हो जैसे जिस्म का कोई हिस्सा माउफ हो जाता है तो जिस्म के सारे आजा उसका साथ देते हैं।
ईदगाह पर जाकर दुआ मांगते हैं तो खुदा इसे बेशुमार नेमते मयस्सर फरमाता हैं
खुदा भी अपने बंदे से खुश होकर ईदगाह पर इसके द्वारा मांगी गई दुआ कुबूल फरमाता है। जब वे ईदगाह से लौटते है तो रब उनसे राजी हो चुका होता हैं।
तीन शख्सों की दुआ रद्द नहीं होती
मौलवी सलमान सहाब ने कहा की हुजूर सल्ल० का इर्शाद है कि तीन आदमियों की दुआ रद्द नहीं होती। एक रोजेदार की, इफ्तार के वक़्त दूसरे आदिल बादशाह की दुआ, तीसरे मजलूम की, जिस को हक़ तआला शानहू बादलों से ऊपर उठा लेते हैं और आसमान के दरवाजे उसके लिए खोल दिए जाते हैं, और इर्शाद होता है की मैं तेरी जरूर मदद करूंगा, गो (किसी मसलहत से) कुछ देर हो जाए।
गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी व मरहूमों के लिए दुआएं खैर कि गई
ईद की नामाज़ के बाद मुल्क में अमन चैन व खुशहाली की दुआ मांगी गई व ईदगाह पर शहर में हिन्दू मुस्लिम ने आपस में एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी खुसूसन मुस्लिम समाज की जानिब से पूरे मुल्क को ईद की मुबारकबाद दी गई। नमाज के बाद समाज जन कब्रस्तान पहुंचे वहां अपने मरहूमों के लिए दुआएं खैर कि गई बड़ा मजमा लगा था।
