बिकने को तैयार गोंडखेल चीनी मिल, आंखों के सामने से निकल गया टेक्सटाइल पार्क | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

बिकने को तैयार गोंडखेल चीनी मिल, आंखों के सामने से निकल गया टेक्सटाइल पार्क | New India Times

आजादी से आज तक एक सुई बनाने की क्षमता विकसित नहीं करने वाले जलगांव के जामनेर ब्लॉक को समूचे महाराष्ट्र में दवाई सिंचाई भलाई की भावनीक राजनीति के लिए पहचाना जाने लगा है। क्षेत्र में 1987 में लगी खंडहर बन चुकी गोंडखेल चीनी मिल आज बिकने के लिए तैयार खड़ी है। उस दौर के लोकनेता और धर्मात्मा ईश्वर जैन ने तत्कालीन समय सरकार के बुते जामनेर को रोजगार के कई प्रॉजेक्ट देने का ईमानदार प्रयास किया। जैन खुद किसी सरकार से कम नहीं थे फिर भी अपनी पार्टी की सरकारों के माध्यम से एक भी बड़ा प्रोजेक्ट उत्पादन की तर्ज़ पर शुरू नहीं करवा सके। किसानी की बानी बुलंद करने वाले वर्तमान मंत्री गिरीश महाजन कभी भी ब्लॉक में निजी एवं सरकारी कारखाने खड़े करने के पक्ष में नहीं रहे।

बिकने को तैयार गोंडखेल चीनी मिल, आंखों के सामने से निकल गया टेक्सटाइल पार्क | New India Times

गोंडखेल की 300 एकड़ जमीन पर बने टीन के चबूतरे के नीचे किसान मज़दूरों की उन तीन पीढ़ियों का मुक़द्दर दफ़न हो गया जो मुंबई पुणे सूरत बैंगलौर दीव दमन के केमिकल कारखानों मे अपना भविष्य खोजने को मजबूर हैं। जो युवा पुरखों की खेती को निशानी समझकर किसानी में मेहनत कर रहा है उसके बच्चे अंधे राष्ट्रवाद के झांसे में आ कर राजनीति में रिटायर्ड होने की कगार पर रुके नेताओं को प्रमोशन दे रहे हैं। स्टार्च फैक्टरी , रम फैक्टरी , सूत कताई यूनिट इतिहास से मिटा दिए गए हैं। 31 मई को चीनी मिल के सभी सदस्यों की जनरल बैठक बुलाई गई है।

बिकने को तैयार गोंडखेल चीनी मिल, आंखों के सामने से निकल गया टेक्सटाइल पार्क | New India Times

शिखर बैंक से लेकर राष्ट्रीय बैंकों की देनदारी , शेयर धारकों की मेहरबानी , मिल के लिए अपनी जमीन दे चुके भूमिहीन किसानों की विवेचना इन सब के बीच संचालक मंडल की ओर से होने वाला निर्णय कोई नई लकीर नहीं खींच पाएगा। निजी हाथों में सौंपी जा चुकी स्टार्च फैक्टरी की कहानी बड़ी अर्थपूर्ण है जिसे हम अपनी अगली रिपोर्ट में पेश करेंगे। 2014 – 19 के बीच जामनेर MIDC में प्रकट होने वाला टेक्सटाइल पार्क जनता की नजरों के सामने अमरावती शिफ्ट कर गया है। बीजेपी सरकार के 11 साल के कार्यकाल में जलगांव जिले में एक भी सार्वजनिक कारखाना नहीं लग सका है।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version