दयाशंकर पांडे, प्रतापगढ़ (यूपी), NIT;
उत्तर प्रदेश में मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश के बावजूद यूपी पुलिस सुधरने का नाम नहीं ले रही है। प्रतापगढ़ जिले के मान्धाता थाना के एक पुलिस अधिकारी ने तो सभी हदों को पार करते हुए एक पीड़ित परिवार से आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर डाली।
मिली जानकारी के मुताबिक प्रतापगढ़ जिले के थाना मान्धाता क्षेत्र के ग्रामसभा शोभीपुर के परसुरामपुर में 16 सितम्बर 2017 को दो पक्षो में गोली चली थी, जिसमें एक तरफ से 302 के मामले में सभी आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, वही दूसरी तरफ से पीड़ित अफसर जहाँ ने अपने पति अख्तर को गोली मारने व इनके परिवार के कई घरों में लूट पाट करने की मान्धाता थाने में 16 सितम्बर 2017 को धारा 307, 379, 506 के तहत मुकदमा दर्ज करवाई थी, जिसमें 8 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इस केस में मुख्य आरोपी ग्राम प्रधान रियाज है। इनके ऊपर इसके पहले भी लाइसेंसी बन्दूक से गोली मारने का मुकदमा मो नसीम ने धारा 307 के तहत दर्ज कराई थी जो अदालत में विचाराधीन है। जो आज भी आजाद घूम रहा है।
अब सवाल यह उठता है कि साधारण वारंटी को पकड़ने के लिए पुलिस गम्भीर आरोपी जैसा वर्ताव करती है
जबकि 2 बार के 307 के आरोपी व 16 सितम्बर 2017 के लूट के आरोपी के दरवाजे पर जाना पुलिस मुनासिब नहीं समझी।100 दिन बीत जाने के बाद भी गिरफ्तारी नही हुई है। आरोप है कि इन मुकदमों के विवेचना कर रहे थाना मान्धाता के प्रभारी इंस्पेक्टर एम पी सिंह 379 व 307 के आरोपी ग्राम प्रधान रियाज से कई बार मिल भी चुके है जिसकी फोटो भी मौजूद है।
पीड़िता अफसर जहां व उनके परिवार के लूट के पीड़ित फैजुद्दीन ने विवेचना कर रहे थाना प्रभारी एम पी सिंह के ऊपर गंभीर आरोप लगाए हैं।उनका कहना है कि थाना प्रभारी हमसे 50 हजार रूपये रियाज प्रधान को पकड़ने के लिए मांग रहे हैं जो अभी तक नही दिया गया है, इसलिए वह आरोपी को नहीं पकड रहे हैं।
अपराध संख्या 239 पर दर्ज धारा 307 व 379 के आरोपी के बंदूक की गोली के छर्रे एक्सरे में स्पस्ट दिखना भी मौजूद है, फिर भी लगभग 3 महीना 10 बीत जाने के बाद भी आरोपी घर पर घूम रहे हैं।
