अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा 03 मई को आयोजित दीक्षांत समारोह पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एनएसयूआई के
प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक है कि वही विश्वविद्यालय, जो बीते आठ वर्षों में छात्रों को समय पर डिग्रियाँ नहीं दे सका, आज दिखावे के लिए दीक्षांत समारोह का आयोजन कर रहा है ।
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि यह समारोह विश्वविद्यालय प्रशासन के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का प्रयास है , न कि छात्रों के भविष्य का उत्सव।
विश्वविद्यालय के शीर्ष पदाधिकारी स्वयं घोटालों में लिप्त हैं:
1. कुलगुरु अशोक खंडेलवाल न केवल नर्सिंग घोटाले, बल्कि करोड़ों रुपये की FD धोखाधड़ी में भी दोषी हैं।
2. कुलसचिव पुष्पराज बघेल पर लोकायुक्त और EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) में प्रकरण पंजीबद्ध हैं, फिर भी वे आज तक पद पर बने हुए हैं।
3. परीक्षा नियंत्रक सचिन कुचिया की भूमिका और भी अधिक आपत्तिजनक है, जिन पर छात्रों के परीक्षा परिणामों व प्रमाण पत्रों को लेकर गंभीर आरोप हैं। ग्वालियर हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा था कि तुम चपरासी बनने लायक नहीं हो ।
CBI जांच के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं।
नर्सिंग महाघोटाले में सबसे पहले ग्वालियर हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2023 में नर्सिंग घोटाले के संबंध में मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से संबद्ध 364 नर्सिंग कॉलेजों की CBI जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन विश्वविद्यालय के भ्रष्ट अधिकारियों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई ।
राज्यपाल और उपमुख्यमंत्री की उपस्थिति दुर्भाग्यपूर्ण
ऐसे भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में महामहिम राज्यपाल और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की उपस्थिति न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह संकेत देती है कि सरकार स्वयं इन भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण प्रदान कर रही है।
NSUI यह मांग करता है कि:
1. विश्वविद्यालय प्रशासन में संलिप्त दोषियों को तत्काल पद से हटाया जाए।
2. नर्सिंग और FD घोटालों की न्यायिक निगरानी में जांच कराई जाए।
3. छात्रों को समय पर डिग्रियाँ और प्रमाणपत्र दिए जाएं ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
यह दीक्षांत समारोह छात्रों का नहीं, भ्रष्टाचारियों का उत्सव है NSUI इसका घोर विरोध करता है।
