नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

किसी शहर को आधुनिक बनाने के वादे के बदले में बरसों बीत जाने के बाद वहां की जनता को अहसान के तौर पर सिर्फ़ एक सड़क मिल जाए इससे उस क्षेत्र के राजनीतिक विवेक का स्तर पता चल जाता है। जलगांव जिले के चोपड़ा यावल रावेर मुक्ताई नगर जामनेर की हालत जस की तस है। गिरिश महाजन के जामनेर में चंद सरकारी इमारतों के बदले खड़े किए दो BOT मार्केट गढ़चिरौली के अंदर से जाने वाली मुख्य सड़क की याद दिलाते हैं। 2016 में 8 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस प्रमुख खोखली सड़क के बार बार किए जा रहे रंगरोगन से लोग अब ऊब चुके हैं। सड़क के बीचोबीच जमीन के नीचे बिछाई गई वाघूर डैम समानांतर पेयजल पाइप लाइन के लीकेज के कारण ये सड़क खोखली हो चुकी है।
पुराने पत्थरों के जर्जर ब्रिजेस से गुजरती सड़क भारी भरकम वाहनों से थर्रा जाती है। जब सौ दो सौ मेहमानों के साथ दूल्हा इस सड़क पर बारात लेकर चलता है तब घंटों लंबा जाम लग जाता है। धर्म के नाम पर डीजे के उन्मादी गानों पर थिरकने वाले हजारों बेरोजगारों को इस सड़क को जाम करने का काम दे रखा है। जामनेर शहर का बाय पास बनकर तैयार है भूमि आबंटन के लिए तीन चार किसानों को सरकार ने जमीन का दाम बेहद कम ऑफर करने के कारण इस अन्याय के खिलाफ किसान कोर्ट में गए हैं।
अमृत काल के 11 साल हाथ से निकल गए हैं जामनेर का मतदाता आज भी सड़क बिजली पानी आरोग्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की राजनीति को वोट दे रहा है। मंत्री गिरीश महाजन चाहे तो किसानों से संवाद कर बाय पास के मामले को कुछ मिनटों में सुलझा सकते हैं। भुसावल बाय पास के साथ साथ जलगांव सड़क को पाचोरा सड़क से बाय पास से जोड़ने की मांग जोर पकड़ रही है।
