2200 मेगावॉट की कमी, 1 लाख करोड़ रुपए बकाया बावजूद दिनदहाड़े बिजली की चोरी | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

2200 मेगावॉट की कमी, 1 लाख करोड़ रुपए बकाया बावजूद दिनदहाड़े बिजली की चोरी | New India Times

2014 बीजेपी सरकार आने के बाद से महाराष्ट्र पर 9 लाख 34 हजार करोड़ रुपए का कर्ज़ चढ़ चुका है। इसमें विश्व बैंक से लिया कर्ज का आंकड़ा सरकार ने सार्वजनिक नहीं किया है। सरकार के सारे के सारे विभाग कर्ज़ में बाल बाल डूब चुके हैं सरकार घाटे में चल रही है। केवल मंत्री विधायकों और बीजेपी नेताओं की बेनामी संपत्ति में इज़ाफ़ा हो रहा है। बिजली बोर्ड 98 हजार करोड़ रुपए के वित्तीय घाटे से जूझ रहा है। चुनावी मुफ्त कृषि बिजली योजना के बकाया रकम के कारण घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को महंगी बिजली खरीदना पड़ रही है। चिलचिलाती गर्मी में बिजली की मांग को पूरा कर पाना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है। 2200 मेगा वैट की कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में पावर कट आरंभ हो गया है।

इन सब के बीच बड़े बड़े शहरों में बिजली ट्रांसफार्मर डीपी से दिनदहाड़े बिजली चोरी का गैर कानूनी और ख़तरनाक जुगाड़ देखने को मिल रहा है। रिहायशी इलाकों में बनाए गए डोम में आयोजित शादियों में बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए प्राइवेट मैरेज मैनेजमेंट ब्यूरोज निजी जनरेटर का इस्तेमाल करने के बजाय सरकारी बिजली बोर्ड के डीपी में वायर डालकर बिजली की चोरी कर रहे हैं। एक पार्टी विशेष से संबंध रखने वाले ये भक्त सरकारी सेक्टर को अपनी बपौती समझकर पैसा बना रहे है। नेता है कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ द्वारा सुप्रीम कोर्ट के विशेष अधिकार पर दिए मूर्खतापूर्ण भाषण की तरह विपक्ष के पास बचा क्या है? जैसी बकवास कर लोकतंत्र का मज़ाक बनाने में खुश है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के अधीन ऊर्जा विभाग धीरे-धीरे संपूर्ण निजीकरण की ओर बढ़ रहा है शायद इस लिए निजीकरण से पहले लूट की छूट का लाभ उठाया जा रहा है।

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