हाशिम अंसारी, लहरपुर-सीतापुर (यूपी), NIT;
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यरुशलम को इजराइल की राजधानी करार दिया जाने के फैसले के खिलाफ पूरी दुनिया में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। यरुशलम इजराइल की राजधानी है, डोनाल्ड ट्रंप के बयान से पूरी दुनिया के मुस्लिम और वीटो पावर देशों ने नाराजगी का इजहार किया है। यरुशलम जहां मुसलमानों की तीसरी पवित्र स्थान वहीं यरुशलम फिलिस्तीन का अटूट हिस्सा है। कई दशकों से इजराइल सरकार इस भूमखंड पर कब्जा करने का प्रयास कर रही है। हाल ही में उसने येरुशलम को अपनी राजधानी घोषित करने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस गैरजिम्मेदाराना बयान के खिलाफ जमीयत उलमा की अगुवाई में जहां पूरे देश में एक साथ अमेरिका और इजराइल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया, वहीं लहरपुर मजाशाह ग्राउंड में एक विशाल प्रदर्शन सभा का आयोजन किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए डॉक्टर अब्दुल मोईद कासमी ने कहा कि यरुशलम से फिलीस्तीनियों का अटूट रिश्ता है, ट्रंप के इस अमानवीय फैसले के खिलाफ हम पूरी ताकत से अपनी आवाज उठाते हैं और भारत सरकार से अपील करते हैं कि जिस तरह से हिंदुस्तान ने आजादी के बाद से फिलिस्तीनियो का साथ दिया है, इस मसले में भी फिलिस्तीनी मुसलमानों का साथ दें। इसके पश्चात मुफ़्ती हिलाल अहमद कासमी (कार्यवाहक जनरल सेक्रेटरी जमीयत उलमा लहरपुर) ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका इस अमानवी फैसले को यदि वापस नहीं लेता तो पूरे मुल्क के मुसलमान सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन के लिए तैयार रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन कर रहे जमीयत उलमा लहरपुर के सेक्रेटरी मौलाना एजाज अहमद नदवी ने कहां की अमेरिका अपनी पहली ही कोशिश में नाकामयाब हो गया है और आज राष्ट्रीय संघ में हुई वोटिंग में फिलिस्तीनी के हक में 128 वोटों का पडना और संयुक्त राष्ट्र संघ में अमेरिका के राष्ट्रपति का यरुशलम के मुद्दे पर अकेले पड़ जाना फ्रांस और ब्रिटेन जैसी ताकतों का फिलिस्तीनी के हक में वोट देना यह दर्शाता है कि आज भी पूरी दुनिया मानवता और इंसानियत के लिए जाग रही है।
इस विशाल धरना प्रदर्शन के मौके पर मौलाना नसरुल्लाह कासमी, मौलाना फारूक कासमी, वजाहत मलिक, सलाहुद्दीन गौरी, मोहम्मद हाशिम अंसारी, इरफान अंसारी, मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद अहमद, कारी जैनुल आबेदीन, मौलाना एहतराम कासमी, शोएब शमस समेत कस्बे के वरिष्ठ एवं सम्मानित लोगों के साथ हजारों लोग उपस्थित रहे।
