मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

03 और 04 अप्रैल हिन्दुस्तान की तारीख में ऐसा काला दिन, जब मुसलमानों के खिलाफ़ और वक़्फ़ कानून में संविधान विरोधी बदलाव के समर्थन में कुछ सांप्रदायिक ताकतें सत्ता के नशे में चूर देश को हिंदू और मुसलमान के नाम पर बांटने को आमादा थी तो वहीं देश के सेकुलर नेताओं ने भाजपा के संविधान विरोधी काले कानून उम्मीद की मुखालिफत में खुल कर सामने आए और पुरज़ोर तरीके से उसकी मुखालिफत भी किए। उन्हीं सच्चे देश भक्तों की सफ़ में एक दीवाना इमरान प्रतापगढ़ी भी खड़ा था जिसने वक़्फ़ संशोधन बिल की मुखालिफत करते हुए राज्य सभा में जब अपनी बात शुरू की तो तारीख के ऐसे ऐसे पन्ने पलट दिए के चंद घंटों में पूरे मुल्क के हर न्यूज़ चैनल और सोशल मीडिया पर हुकूमत की ईंट से ईंट बजाते हुए नज़र आया।
इमरान प्रतापगढ़ी ने देश को बताया कि बंटवारे के वक्त जो मुसलमान देश छोड़ कर जाए रहे थे उस वक़्त दिल्ली की जामा मस्जिद की सीढ़ियों से खड़े होकर भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने उन्हें याद दिलाया के मुसलमानों तुम जिस ज़मीन को छोड़कर जा रहे हो वो तुम्हारी अपनी ज़मीन है। ये ही तुम्हारा अपना वतन है । यहाँ तुम्हारी इबादत गाहें, दीनी मदारिस बने हैं। इसी मिट्टी में तुम्हारे बाप दादाओं की कबरें बनी हैं। तुम कैसे इन्हें वीरान छोड़कर जा सकते हो। तब मौलाना आज़ाद की इस बात पर लोगों ने अपने सारों की गठरियां फेंक दी।
आज उसी जामा मस्जिद की सीढ़ियों से सबूत मांगा जाएगा और फिर मौलाना आज़ाद को अपनी कब्र से ये सदा देनी पड़ेगी के ये कब्र मेरी है। हुकूमत की जागीर नहीं । इमरान प्रतापगढ़ी ने इस काले कानून को न सिर्फ मुसलमान विरोधी बताया बल्कि संविधान विरोधी बताते हुए कहा के ये देश विरोधी कानून है। सरकार इस बिल को पास कराकर मुसलमानों की जमीनों पर नाजायज़ कब्ज़ा करके उसे अपने पूंजीपति दोस्तों को बेचने का मंसूबा बना रही है। मुसलमानों ने इस देश के लिए जो कुर्बानियाँ दी है जिसको मौजूदा सरकार मिटाने की कोशिश कर रही है। उसको याद दिलाते हुए इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि
हमीं को क़ातिल कहेगी दुनियां, हमारा ही क़त्ल ए आम होगा। हमीं कुंए खोदते फिरेंगे, हमीं पे पानी हराम होगा।
इमरान प्रतापगढ़ी के हौंसले की दाद देते हुए हम सभी ऐसे सच्चे महीसा की कयादत को कबूल करते हैं और उसके रोशन मुस्तकबिल की दुआ करते हैं। उक्त जानकारी बुरहानपुर के प्रसिद्ध अल्पसंख्यक कांग्रेस नेता डॉक्टर फरीद क़ाज़ी के माध्यम से प्राप्त हुई।

