अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:

वक़्फ़ संशोधन बिल को लेकर देश भर में बवाल मचा है। ऐसे में कोमी ख़िदमत गार भोपाल के हाजी मोहम्मद इमरान का कहना है कि भारत सरकार वक़्फ़ संपत्तियों से मुसलमानों का हित ही चाहती है तो पहले से मौजूद वक़्फ़ एक्ट के मुताबिक कार्य करे। पिछले 15 वर्षों से वक़्फ़ बोर्ड का गठन सरकार कर रही है। सरकार के नुमाइंदे पिछले 15 वर्षों से पदों पर बैठे हैं लेकिन वक़्फ़ बोर्ड के पदाधिकारी न तो मुस्लिम समाज को फायदा पहुंचा पाए और न ही वक़्फ़ संपत्ति की सुरक्षा कर पाए। क़ब्रिस्तानों ,इदगाहों,वक़्फ़ सम्पत्ति की दुर्दशा सबके सामने है। उन्हों ने कहा कि नए बिल या कानून की ज़रूरत नहीं है। अगर मुस्लिम समाज के हित के लिए करना ही है तो पहले से क़ानून मौजूद है। उन्हों ने कहा कि वक़्फ़ नुमाईंदों ने उन क़ानून का पालन नही किया। अभी भी नाम निहाद वक़्फ़ बोर्ड तो है पर मुसलमानों के हित के लिए कोई कार्य नहीं हो रहे हैं।हर प्रदेश में वक़्फ़ बोर्ड है पर सभी बोर्ड सरकार की मंशा के मुताबिक कार्य कर रहे हैं । किसी भी समाज के हित के लिए कोई कानून या बिल बनाया जाता है तो समाज के रहनुमाओं से विचार विमर्श किया जाता है और वक़्फ़ तो एक धार्मिक मामला है इस में हमारे उलमाओं धर्मगुरुओं से विचार विमर्श किया जाना चाहिए था लेकिन सरकार द्वारा नहीं किया गया। उनका कहना है कि सरकार द्वारा देश की तरक़्क़ी ,विकास ,शिक्षा, रोज़गार ,भुखमरी जैसी समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिशें की जा रही हैं । यह समस्या हर धर्म समाज के लोगों की है जो गंभीरता का विषय है जिसको हल करने की ज़रूरत है ना कि वक़्फ़ एक्ट में संशोधन की, या नए कानून की, वक़्फ़ मुस्लिम समाज का धार्मिक मसला है। वक़्फ संपत्ति का इस्तेमाल धार्मिक कार्यों, सार्वजनिक और सामुदायिक सुविधाओं के लिए किया जाता है। वक़्फ से प्राप्त आय का उपयोग गरीबों, विधवाओं, यतीम बच्चों और ज़रूरतमंदों की मदद के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से समुदाय के गरीब लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के प्रयास किए जाते हैं। अस्पताल, यतीमखाने , सराय, धर्मशाला स्कूल कॉलेज आदि का निर्माण भी किया जाता है ताकि मुस्लिम समाज को इसका लाभ मिल सके वक़्फ़ मुस्लिम समाज के सार्वजनिक कल्याण के लिए किया जाता है और अल्लाह की रज़ा के लिए किया जाता है इसमें सरकार का हस्तक्षेप मुसलमानों को कोई फायदा नहीं पहुंचाए गा।
