नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

दिल्ली के संसद भवन में दो दिवसीय युवा संसद महोत्सव का आयोजन करवाया गया। जिला स्तर पर युवा चौपालों के माध्यम से तैयार की गई इस पहल को संसद में अंजाम दिया गया। 75 हज़ार नौजवानों ने चंद मिनटों के संवाद वीडियो प्रस्तुत किए उनमें से बेहतरीन को चुनकर संसद में जिरह करने के लिए नए वक्ताओं के तौर पर मौका प्रदान किया गया। केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया और रक्षा खडसे ने युवा सांसद के कामकाज में हिस्सा लिया।

कुल 18 टीम में 09 ने सांसद और 09 ने शैडो विधायक बनकर आवाम की कयादत की। मंत्रियों ने युवा नेताओं के सवालों के जवाब दिए। बहस के लिए असली संसद में गिर चुके बिल वन नेशन वन इलेक्शन को चुना गया। बीते सत्र में यह बिल 542 के मुकाबले 269 वोट लेकर गिर गया था जबकि इसे पास कराने के लिए मोदी सरकार के पास दो तिहाई बहुमत नहीं था।
छात्रों से दूर रखा गया वक़्फ बिल
युवा संसद में वन नेशन वन इलेक्शन जैसे एक बेकार बिल की जगह वक़्फ संशोधन बिल को युवाओं के सामने रखा जाना चाहिए था जो नहीं किया गया। मोदी सरकार ने विपक्ष की असहमति को कुचलकर आधी रात को वक्फ बोर्ड संशोधन बिल लोकसभा में मंजूर करवा लिया। हंगामे के बीच तमाम संशोधनों की विपक्ष की दरखास्त को दरकिनार करते हुए वक़्फ़ बिल को राज्यसभा में जबरन मंजूर कर दिया गया है। मसावात धर्मनिरपेक्षता पर आधारित भारत के संविधान को क्षति पहुंचाकर मुसलमानों को दूसरे नंबर का शहरी बनाने की ओर कदम बढ़ा चुके इस बिल को अनुच्छेद 25, 26 के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। गुलाम मीडिया किसी बस डिपो में नई बसेस के आने की खबर को आप जनता के बीच विकसित भारत के रूप में पेश करता है लेकिन संसदीय कामकाज और संविधान पर एक स्टोरी नहीं करता। बहुसंख्यक आबादी को दूसरे समुदाय के खिलाफ़ हांकने वाली नफरती सोच इस बिल को टूल किट के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।
