वक्फ संपत्तियों पर सरकारी हस्तक्षेप नामंजूर, केंद्र सरकार का वक्फ बिल मुस्लिम समाज के खिलाफ: शकील खान | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

वक्फ संपत्तियों पर सरकारी हस्तक्षेप नामंजूर, केंद्र सरकार का वक्फ बिल मुस्लिम समाज के खिलाफ: शकील खान | New India Times

वक्फ संपत्तियां किसी भी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होती, बल्कि वे अल्लाह की अमानत होती है। इसे बेचना, खरीदना या इसमें सरकार का हस्तक्षेप बिल्कुल अस्वीकार्य है। वक्फ संपत्ति संरक्षण बोर्ड जयपुर की रजिस्टर्ड संस्था है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष रईस कुरैशी हैं। उपाध्यक्ष मसूद जावेद क़ादरी हैं। वक्फ संपत्ति संरक्षण बोर्ड के जिला अध्यक्ष शकील खान ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए वक्फ बिल का कड़ा विरोध किया है। (हाल के देर रात्रि लोकसभा में यह बिल पारित हो चुका है) उन्होंने कहा कि यह बिल मुस्लिम समाज की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण की कोशिशों को तुरंत रोका जाए।

मुस्लिम समाज इस बिल के विरोध में पुरजोर आवाज़ उठा रहा है और विभिन्न शहरों में प्रदर्शन की तैयारियां हो रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वक्फ हमारी अमानत है, इसे बचाना हमारी जिम्मेदारी है। सरकारी हस्तक्षेप नामंजूर, वक्फ पर कब्जा नामंजूर। वक्फ संपत्ति पर नहीं चलेगा सरकारी डंडा। वक्फ को बेचने का षड्यंत्र बंद करो। धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बंद करो। जो वक्फ पर कब्जा करेगा, वह ज़ुल्म करेगा। वक्फ संपत्ति हमारी शान, इस पर नहीं चलेगा किसी का फरमान। केंद्र सरकार होश में आओ, वक्फ से दूर हट जाओ। वक्फ पर कब्जा करने वालों, शर्म करो। वक्फ की हिफाज़त करेंगे, किसी से नहीं डरेंगे। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मसूद जावेद क़ादरी ने साफ कहा कि अगर सरकार ने इस बिल को वापस नहीं लिया, तो विरोध और तेज़ होगा।

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