छठी अनुसूची की बात की तो हमारे बच्चों को जेल में डाला गया: सोनम वांगचुक | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

छठी अनुसूची की बात की तो हमारे बच्चों को जेल में डाला गया: सोनम वांगचुक | New India Times

सत्तर सालों से हम यूनियन टेरेटरी की मांग कर रहे थे 2019 में वो पूरी हुई जिससे लोग बहुत खुश थे। चुनावों में सत्ता पक्ष ने वादा किया कि लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाएगा। हमारे बच्चों ने हमारे लोगों ने इस वादे को याद दिलाया तो जेल में डाला गया। लद्दाख को कार्पोरेट के लिए खोला गया हमारे लोग खदेड़े गए फ़िर मैंने गांधी का रास्ता चुना और अनशन पदयात्रा के माध्यम से सरकार को बातचीत करने के लिए मजबूर किया। यह विचार रखे हैं सोनम वांगचुक ने वे पुणे के कोथरुड में महाराष्ट्र गांधी स्मारक निधि युवक क्रांति दल द्वारा आयोजित गांधी विचार साहित्य सम्मेलन के समापन भाषण में बोल रहे थे। सोनम ने कहा कि मेरे अभिभावक मुझे सिविल इंजीनियरिंग पढ़वाना चाहते थे लेकिन मुझे सूरज की रोशनी की बड़ी जिज्ञासा थी इस लिए मेरी रुची मैकेनिकल इंजीनियरिंग में रही। मैंने परिवार के खिलाफ़ जाकर पढ़ाई पूरी करने की ठानी खर्चे के लिए औद्योगिक पर्यटन की छुट्टियों में लद्दाख जाता वहां बच्चों को पढ़ाकर कुछ पैसे कमा लेता था। वहां मैंने शिक्षा में सुधार लाने का काम शुरू किया। आज शिक्षा पैसे कमाने का जरिया बन गया है। आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन के कारण पर्यावरण की हानी हो रही है। लदाख में 150 वर्ग किलो मीटर जमीन कार्पोरेट को खुश करने के लिए रखी गई है। इससे सरकार कहीं चीन को मौका तो नहीं दे रही है। पूरे देश में लोग डरे हुए हैं मीडिया चुप हैं , किसी के विरोधी और अंधभक्त मत बनो इससे देश का निर्माण नहीं होगा। मंच पर कुमार सप्तर्षि , अनवर राजन , लक्ष्मीकांत देशमुख , सुरेश द्वादशीवार , शिवाजीराव कदम , रामदास भटकल मौजूद रहे।

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