साढ़े छः वर्षीय आयशा ने रखा अपना पहला रोजा | New India Times

शमसुद्दोहा, ब्यूरो चीफ, गोरखपुर (यूपी), NIT:

साढ़े छः वर्षीय आयशा ने रखा अपना पहला रोजा | New India Times

माह-ए-रमज़ान का पवित्र महीना शुरू हो चुका है। बड़ों के साथ साथ नन्हें रोज़ेदारों के भी हौसले बुलंद हैं। नगर पंचायत सहजनवां के मेन मार्केट में स्थित सोनू ड्रेसेज के प्रोपराइटर अज़ीज़ अहमद की साढ़े छह वर्षीय बेटी आयशा ने मुकद्दस माह-ए-रमजान के पहले दिन इतवार का रोजा रखने की अपने अम्मी अब्बू से इच्छा जताई। माता पिता ने बेटी को समझाया, कि अभी छोटी हो न रहो लेकिन बेटी आयशा रोजा रखने की अपनी जिद पर अड़ी रही। बेटी की जिद के आगे माता पिता ने रोजा रखने की इजाजत दे दी। उन्होंने माता पिता के साथ सेहरी कर रोजा रखा। पहला रोजा रखने से बच्ची के चेहरे पर भूख प्यास का असर साफ दिखाई दिया, लेकिन आयशा कहती थी मुझे भूख प्यास कुछ भी नहीं लगा है। बेटी आयशा ने रमजान के पहले दिन इतवार का अपना रोजा पूरा किया। मां ने भी बेटी की इफ्तारी के लिए विशेष पकवान बनाए और सभी परिजनों ने साथ में इफ्तार किया। बच्ची के रोजा रखने से पूरे परिवार में खुशी का माहौल बना रहा और बेटी भी रोजा रखकर खुश दिखाई दी। घर वालों नें आयशा को फूलों का माला पहनाकर उसकी हौसला अफ़ज़ाई की। माह-ए-रमजान में रोजा, सिर्फ खाने पीने से रुकने का नाम नहीं है, बल्कि वह जिस्मानी, रूहानी और समाजी दुरुस्तगी और इंसानी हमदर्दी, अखलाक और मुहब्बत को बढ़ावा देता है और कुदरत के नेअमतों का अंदाजा होता है। वहीं नन्हीं परी रोजेदार आयशा को माह-ए-रमजान का पहला रोजा रखने पर माता-पिता सहित घर वालों, रिश्तेदार, गांव वालों एवं क्षेत्रवासियों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

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