नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

144 साल बाद प्रयाग में आयोजित पूर्ण कुंभ उत्सव के त्रिवेणी संगम में शाही गोता लगाने के लिए तंत्रयान शैव सम्प्रदाय के तमाम अखाड़े एकजुट हो गए हैं। भारत की सिंधू संस्कृति का अध्ययन करने के लिए देश-विदेश से सैलानी लाखों की संख्या में प्रयाग पहुंच रहे हैं। 45 दिन चलने वाले भगवान शंकर के पूजा महापर्व में सरकार के मंत्री विपक्ष के नेता विभिन्न अखाड़ों में जा कर सजदा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साथ मुख्यमंत्री अजय कुमार बिष्ट समेत बीजेपी के बड़े नेताओं ने आस्था नगरी की सैर की। महाराष्ट्र से मंत्री रक्षा खडसे ने द्वारका शारदा पीठ के स्वामी सदानंद सरस्वती के दर्शन कर आशीर्वाद लिए। खडसे ने कुंभ के प्रबंधन का जायजा लिया और वहां लंगर में सेवादारी भी की। जलगांव से गए जगदेव बोरसे ने New India Time’s को बताया कि कुंभ में इंतजामात काफ़ी अच्छे हैं। जहाज़ से नदियों के तट विहार का किराया 500 रुपया थोड़ा अधिक है जिसे कम किया जाना चाहिए।
तीर्थ यात्रा योजना बंद: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वोटों के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को देवेंद्र फडणवीस सरकार ने बंद कर दिया है। इसके चलते महाराष्ट्र के बड़े बुज़ुर्ग अब अपने राज्य के भीतर रियायती दर पर तीर्थ यात्रा नहीं कर सकेंगे। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अयोध्या (फ़ैजाबाद) में राम मंदिर खोला गया। राम जी के दर्शन के लिए बीजेपी की ओर से देश भर से हजारों यात्री ट्रेनें छोड़ी गई थीं। आज देश में कहीं भी बड़ा चुनाव नहीं है इस लिए महंगाई से त्रस्त भूतनाथ के भक्त कुंभ से कोसों दूर खड़े हैं।
कोर्ट ने मनाया गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस के मौके पर देश के तमाम न्यायालयों में संविधान की प्रस्तावना का सामुदायिक पठन किया गया। जलगांव सत्र न्यायालय के अंतर्गत जामनेर में न्या. डी एन चामले ने तिरंगा फहराया. न्या भूषण काले, न्या प्रशांत सूर्यवंशी, सरकारी वकील अनिल सारस्वत, कृतिका भट, कमलाकर बारी, दिगंबर गोतमारे, अशोक डोल्हारे, अरुण पाटील, वी एस पाटील, प्रकाश पाटील, महेंद्र पाटील, बी एम चौधरी, अनिता पाटील, सोनाली सुरवाडे, शिल्पा सावले, रूपाली पाटील यह सभी एडवोकेटस मौजूद रहे। तमाम अखबारों में सरकारी खर्चे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संविधान की किताब के सामने शीश नवाने की बड़ी सी फोटो छपवाने के बाद भी सोशल मीडिया में गणतंत्र दिवस को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाए जाने का अज्ञात समाज में रायते की तरह फैलाया गया।
