आशा रैकवार, भोपाल (मप्र), NIT;
मध्य प्रदेश में सरकार के दावों से किसानों के घावों पर मरहम नहीं लग पा रहा है। आए दिन किसानों की मौत के मामले सामने आ रहे हैं, कभी कर्ज से परेशान होकर तो कभी सरकार की सरकारी नीतियों से आहत होकर किसान मौत को गले लगा लेता है, तो कभी जहर पीकर अपनी जिदंगी की लीला को समाप्त कर देता है। ताजा मामला मध्यप्रदेश के हरदा जिले का है, जहां किसान महेश पांडे ने बिजली विभाग द्वारा थमाए गए नोटिस के रुपये समय पर भुगतान ना किए जाने से परेशान होकर कूएं में कूदकर अपनी जान दे दी। घटना की खबर लगते ही परिजनों और गांव वालों ने पुलिस को इस बात की सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को बरामद कर लिया है और पीएम के लिए भेज दिया है। हालांकि पुलिस की तरफ से अभी आत्महत्या का कोई कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। जांच के बाद ही पुलिस मामले की जानकारी दे पाएगी।
दरअसल, कुछ दिनों पहले जिले के ग्राम अबगांवकला में रहने वाले 60 वर्षीय किसान महेश पांडे को बिजली विभाग द्वारा 9000/- के बिल भुगतान का नोटिस थमाया गया था। जिसको लेकर वह हमेशा परेशान रहता था। चुंकी इस साल फसल में भी अच्छा खासा नुकसान हो गया था जिसके चलते पैसों की किल्लत होने लगी थी। परिजनों की मानें तो महेश रविवार शाम से घर नहीं आया था और आज सोमवार सुबह भाजपा के व्यापारी प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक कमल अजमेरा के खेत में बने कुएं में उसका शव मिला। मृतक किसान के पास ढाई एकड़ जमीन थी। इसी राशि की वसूली के लिए 12 दिसंबर को लोक अदालत में उसकी पेशी होनी थी।बताया जा रहा है कि कोर्ट का नोटिस लेकर पुलिस किसान के घर पर पहुंची थी, इसी बात को लेकर वह काफी परेशान चल रहा है औऱ इसी के दबाव में आकर उसने ये कदम उठा लिया।
