नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

लाडली बहन योजना और मुस्लिम तथा मराठा समुदाय के विकल्प में ओबीसी , SC , NT/VJNT/DNT का ध्रुवीकरण करने में कामयाब रही भाजपा ने धन जन व संसाधनों के बलबूते महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव एकतरफा जीता। एक लाख वोटों से जीतने का दावा करने वाले भाजपा के सीनियर नेता गिरीश महाजन अपने निर्वाचन क्षेत्र के इर्द गिर्द रहकर महज़ 26 हजार वोट से जीत पाए। महाजन की जीत में बीजेपी नेता संजय गरुड़ का योगदान काफ़ी बड़ा है। जलगांव जिले के सभी 11 विधानसभा सीटों पर युति के प्रत्याशी विधायक चुने गए।
जामनेर के इतिहास में पहली बार विपक्ष के किसी उम्मीदवार को एक लाख से अधिक वोट मिले हैं। दिलीप खोड़पे सर के बेदाग और लोकप्रिय चेहरे के कारण जनता ने उनको इतने वोट दिए। नतीजों के बाद संपन्न महाविकास आघाड़ी कि प्रेस वार्ता में खोड़पे सर ने जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। आघाड़ी के समन्वयक राजू बोहरा ने हार की जिम्मेदारी स्वीकार करी। कहा कि खोड़पे सर के कारण हमें इतने वोट मिले हैं यह लड़ाई धनशक्ति के विरोध में थी।
भविष्य में भी ऐसी हि स्थिति रहेगी बावजूद इसके आगामी जिला पंचायत और पंचायत समिति के चुनाव के लिए हमें अभी से काम पर लगना होगा। बीजेपी को जामनेर और शेंदुर्णी इन शहरी निकाय क्षेत्रों में बढ़त है ग्रामीण इलाकों में हम लोग मजबूत हैं। डी के पाटिल डॉ प्रशांत पाटील ने EVM पर सवाल उठाए जिसे उनके शीर्ष नेता NCP चीफ़ शरद पवार सिरे से खारिज़ कर चुके हैं।
MVA के सामने कई चुनौतियां: जलगांव जिले में करारी हार का मुंह देखने वाली MVA को आने वाले दिनों में सरकार में बैठी बीजेपी के धन संसाधन संगठन से कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। जामनेर निर्वाचन क्षेत्र में मिले जनाधार को सहेजकर रखते हुए उसे आगामी जिला परिषद पंचायत समिति चुनाव नतीजों में जीत की शक्ल में उबदलना आघाड़ी के लिए आसान काम नहीं होगा। जामनेर शहर में NCP (SP) को स्वतंत्र रूप से स्थायी पार्टी कार्यालय के माध्यम से लगातार जनता के बीच रहना होगा। मजबूत सोशल मीडिया विंग के साथ-साथ मुख्य धारा की मीडिया से संवाद की दरकार है।
