ओवेस सिद्दीकी, अकोला (महाराष्ट्र), NIT;
प्लास्टिक की थैलियों से पर्यावरण को गंभीर खतरा होने के खतरे के प्रमाण मिलने के बाद महाराष्ट्र में प्लास्टिक की पतली थैलीयां प्रतिबंध की गई हैं लेकिन फिर भी प्लस्टिक थैलियों के इस्तेमाल में कमी नहीं आ रही है।अकोला शहर में किराणा दुकानों तथा बाजारों मे धडल्ले से प्रतिबंधित 50 मैक्रोन से कम साईज वाली थैलियों का थोक एवं खुदरा करोबार जोरोंरपर चल रहा है, जिसकी ओर मनपा प्रशासन पूर्ण तरिके से आँखे बंद किए हुए नजर आ रही है।
जहां इन थैलियों से पर्यावरण को गंभीर से खतरा है वहीं इन थैलियों की वजाह से मवेशी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। विगत दिनों एक गाय पर स्नातकोत्तर पशु वैद्यकीय एवं पशु विज्ञान संस्था में 4 घंटे तक शल्यक्रिया कर उसके पेट से कारीब 40 किलो प्लास्टिक पन्नियं निकाली गइ थीं। प्लास्टिक थैलियों से संभावित खतरों के कारण प्लास्टिक थैलियों के इस्तेमाल पर प्रशासन द्वारा बंदी लागाई गइ है, लेकिन इस मामले में प्रशासन के लचर रवैए के कारण बाजार में धडल्ले से प्लास्टिक की थैलीयां उपलब्ध हो रही हैं। एक जाणकारी के अनुसार शहर में प्रती माह कारीब एक हजार किलो 50 मैक्रोन से कम साईज वाली पन्नियों बाहरी शहरों से आती हैं, यह काहां से आती हैं और अकोला में थोक विक्रेता कौन कौन है, जिन पर अंकुश लगाना जरुरी है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस संदर्भ में कारवाई न करने के एवज में प्लास्टिक पन्नियों के थोक विक्रेताओं द्वारा मनपा के आला अधिकारियों को मोटी रकम दी जाती है, जिस्केई चलते सब पता होते हुए भी मनपा प्रशासन थैलीयो की बिक्री की ओर आँखे बंद किए हुए है। इन थैलियों से पर्यावरण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है, वही मवेशी के जीवन को भी धोका निर्माण हो रहा है।
इस संदर्भ में मनपा प्रभारी आयुक्त खुद कारवाई कर किराणा दुकान ,बाजरी एवं ठोक विक्रेताओं पर ठोस कारवाई किए जाने की जरूरत महसूस हो रही है।
मनपा द्वारा विशेष मुहिम चला कर इस संदर्भ में कारवाई की जयेंगी। नागरिकों को आवाहन है की प्लास्टिक कॅरीबैग का इस्तेमाल ना करें, पर्यावरण को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाए रखने में सहकार्य करें: प्रा. संजय खडसे, प्रभारी उपयुक्त मनपा अकोला
