जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

भाजपा द्वारा जात और धर्म की राजनीति कोई नई बात नहीं परंतु उत्तर प्रदेश मॉडल का अनुसरण मध्य प्रदेश में भी होना, यह मध्य प्रदेश के लिए चिंताजनक विषय है। उत्तर प्रदेश में ठेले पर ठेले वाले का नाम लिखने के निर्णय का भाजपा के सहयोगी दलों ने भी विरोध किया है। भाजपा के एक विधायक के द्वारा मध्य प्रदेश में भी यही कृत्य करने की मांग की गई है जिसका दलित समाज की ओर से एवं कांग्रेस पार्टी की ओर से विरोध किया जा रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने मिथुन अहिरवार ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि आपके एक विधायक ने मध्य प्रदेश में भी ठेले वाले का नाम लिखने की मांग की है। कई बार दलित समाज के लोग जो भोजन बनाने की व्यवस्था में लिप्त हैं उनको पूर्वाग्रह की नजर से देखा जाता है। मध्य प्रदेश समेत पूरे देश मे उदाहरण हैं जहां मिड डे मील मे दलित महिलाओं द्वारा बनाया भोजन खाने से बच्चों ने इनकार कर दिया ।इसी देश मे बिरयानी बेचते एक युवक की तब पिटाई कर दी गई जब लोगों को पता चल कि वह दलित है। वैसे भी किसी के नाम से यह पता नहीं चलता कि भोजन शुद्ध शाकाहारी है या मांसाहारी, सभी समाज के लोग सभी तरीके के भोजन की प्राथमिकताएं रखते हैं, यदि पहले नाम का जिक्र किया जाए तो गुड्डू, मुन्ना, लकी, जैसे नाम इनसे किसी का धर्म या जात नहीं पता चलता, आगे जाकर हो सकता है मांग की जाए कि पूरा नाम सरनेम सहित लिखा जाए।
अतः मध्य प्रदेश के दलित समाज से जुड़े एक नागरिक के तौर पर मैं आप से मांग करता हूं कि आपके विधायक की इस मांग को खारिज किया जाए तथा मध्य प्रदेश में ऐसी कोई भी पूर्वाग्रह से ग्रसित अथवा घृणित राजनीति को स्थान न दिया जाए।
