ताहिर मिर्ज़ा, उमरखेड़ (महाराष्ट्र), NIT;
आज के युग में अपने भी पराए हो जाते हैं, अक्सर खून का रिश्ता भी एक पल में पराया बन जाता है। जिन मां बाप ने जन्म दिया है उनको भी एक समय ऐसा आता है के खुद की संपत्ती जिन्हें इन मां बाप ने अपनी जान से ज़्यादा ख्याल रखा व अच्छा इंसान बनाया लेकिन वह भी अपने स्वार्थ के लिए इन्हीं मां-बाप को उन्हीं के घर से बेघर कर देते हैं। ऐसे बेसहरा, बीमार व कमज़ोर लोगों को मरखेड वन विभाग की ओर से इस ठण्डी के मौसम में कंबल का वितरण किया गया।
शहर के बस स्टैण्ड व हनुमान मंदीर परिसर में ऐसे ही कुछ लोग आशियाना बना कर ज़िंदगी के आखरी कीमती वक्त गुज़ार रहे हैं। ऐसे निराधार लोगों में कंबल वितरण किया गया। इस अनमोल समाज सेवा के कार्य में वन विभाग के सभी पदाधिकारी मौजूद थे।
