हमाली का भुगतान भी भुगत रहा अन्नदाता किसान, 1 क्विंटल पर ₹10 हमाली वसूल रहे हैं व्यापारी | New India Times

अश्वनी मिश्रा, छपारा-सिवनी (मप्र), NIT; ​हमाली का भुगतान भी भुगत रहा अन्नदाता किसान, 1 क्विंटल पर ₹10 हमाली वसूल रहे हैं व्यापारी | New India Timesसिवनी जिले की छपारा कृषि उपज मंडी में भावांतर योजना के तहत चल रही मक्का खरीदी में कमीशनबाजी के साथ-साथ व्यापारियों और मंडी अधिकारियों व प्रतिनिधियों के बीच मुनाफाखोरी और कमीशनबाजी के चलते अन्नदाता किसान को प्रति क्विंटल ₹10 हमाली का भुगतान भी खरीददार व्यापारी को करना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष प्रदेश सरकार के द्वारा भावांतर योजना के तहत 8 अनाजों की खरीदी 16 अक्टूबर से कृषि उपज मंडी प्रांगण में की जा रही है। भावंतर के भंवर जाल में किसान फंसता जा रहा है।रोजाना आ रहे निर्देशों से किसानों की फजीहत हो रही है। व्यापारी और मंडी अधिकारियों के साथ साथ मंडी प्रतिनिधियों की चौकड़ी के बीच कमीशनबाजी और मुनाफाखोरी के चलते खरीददार व्यापारी किसानों से प्रति क्विंटल ₹10 हमाली भुगतान भी काट रहा है, जिसके चलते गरीब और लघु सीमांत किसानों की हालत बद से बदतर होती जा रही है।​हमाली का भुगतान भी भुगत रहा अन्नदाता किसान, 1 क्विंटल पर ₹10 हमाली वसूल रहे हैं व्यापारी | New India Times

व्यापारियों ने बनाया सिंडिकेट

छपारा कृषि उपज मंडी प्रांगण में भावंतर योजना के तहत चल रही मक्का खरीदी में छपारा के व्यापारियों ने सिंडिकेट बनाते हुए किसानों के मक्के की फसल को अत्यंत कम बोली पर खरीदना शुरू कर दिया है। आलम तो यह है कि अच्छी क्वालिटी का मक्का भी 1 हजार रुपये से 11 सौ रुपये के बीच व्यापारी बोली लगाकर खरीद रहे हैं। 

आंखें बंद कर तमाशा देख रहे हैं पदाधिकारी 

 मुनाफाखोरी की हवस के चलते किसानों से प्रति क्विंटल 10 रुपए व्यापारी के द्वारा काटे जा रहे हैं, इस बात की जानकारी मंडी सचिव के साथ साथ मंडी के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष को भी है लेकिन सभी आंखों पर पट्टी बांधकर तमाशा देख रहे हैं। व्यापारियों तथा मंडी के अधिकारियों और मंडी के चुने हुए जन प्रतिनिधियों के बीच कमीशनबाजी और मुनाफाखोरी के चलते अन्नदाता किसान अपने आप को असहाय महसूस कर रहा है और खून पसीना एक कर उगाई गई अपनी मक्के की फसल को औने-पौने दाम पर व्यापारियों को बेचने पर मजबूर है। यही नहीं व्यापारियों के द्वारा खरीदी गई मक्के की फसल को प्रति क्विंटल ₹10 हमाली का खर्चा भी किसानों के सिर पर थोपा जा रहा है। ऐसे में भावांतर योजना की निगरानी के लिए बनाए गए जांच दल के ऊपर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

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