वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए वट सावित्री का व्रत आज बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। जनपद में वट वृक्ष की पूजा व परिक्रमा के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में सुहागिनें आती हैं। मेला रोड स्थित शिव मंदिर में वट वृक्ष की पूजा करने व परिक्रमा लगाने से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है। इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में खुशियां आती है। इस दिन व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा करने से लंबी आयु सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य तो प्राप्त होता ही है साथ ही हर तरह के कलह और संतापों का नाश भी होता है। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर रखा जाता है। इस बार अमावस्या तिथि की शुरुआत 5 जून की शाम को 5 बजकर 54 मिनट से प्रारम्भ होकर 6 जून की शाम 6 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के कारण वट सावित्री व्रत 6 जून को मनाया जा रहा है।पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
मधुरेश महाराज ने कहा कि बहुत सी सुहागिनें वट वृक्ष की बजाय गमले में लगे बरगद की पूजा करती हैं जो सही नहीं है क्योंकि बरगद की छाल में विष्णु, जड़ में ब्रह्मा और शाखाओं में शिव का वास माना जाता है। इसके अलावा पेड़ की शाखाएं, जो नीचे की तरफ लटकी रहती हैं, उनको मां सावित्री कहा जाता है। ऐसे में पूजा के दौरान बरगद की छांव व्रती पर पड़ना चाहिए तभी इन सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पौराणिक कथा के अनुसार बरगद के पेड़ के नीचे ही यमराज ने सावित्री के पति के प्राण लौटाए थे। इसी कारण वट वृक्ष की पूजा का बहुत महत्व है। श्री महंत ने कहा कि वट सावित्री व्रत के दिन मंदिर या सार्वजनिक स्थल प बरगद का पौधा जरूर लगाएं,इससे पारिवारिक और आर्थिक समस्या से मुक्ति मिलती है साथ ही सौभाग्यवती महिला को सुहाग की सामग्री का दान करें।
