मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

नगर के तीन पत्रकार संगठन सामूहिक रूप से विभिन्न जनहित की समस्याओं को लेकर अपनी मुखर भूमिका अदा कर रहे हैं। एक मासूम बालिका की हत्या को लेकर पूरे शहर में गुस्से की लहर दिखाई दी वही अनेक सामाजिक संगठनों के साथ पत्रकार संगठन ने भी आरोपी के विरुद्ध एक्शन लेने के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसके परिणाम स्वरूप ज़िला प्रशासन द्वारा आरोपित का मकान तोड़ने की करवाई संपन्न की गई। बताया जाता है कि उक्त आरोपित व्यक्ति सत्ताधारी राजनीतिक दल से जुड़ा होने के साथ हालिया इलेक्शन में वह भाजपा का अभिकर्ता भी रहा है। उक्त आरोपित के बचाव में एक सीनियर पत्रकार ने अपना लेट सोशल मीडिया के माध्यम से पोस्ट किया है जिस पर दो स्वतंत्र पत्रकार सर्वश्री उमेश जंगाले और स्वतंत्र पत्रकार मुल्ला तफज्जुल हुसैन मुलायम वाला ने इसका खंडन करते हुए प्रतिक्रिया व्यक्ति की है जो निम्न अनुसार है:
सबसे पहले तो मैं घटिया पोस्ट और पोस्टकर्ता की सिरे से कड़ी निंदा करता हूं। पोस्टकर्ता इस बात से अनभिज्ञ हैं कि चाहे योगी सरकार हो या पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज की सरकार या वर्तमान की मोहन सरकार हो इन सरकारों ने अपराधों के रोकथाम के लिए कई अपराधियों के मकानों पर कई बार बुलडोजर चलाने की कार्यवाई की है। बुरहानपुर में हुई कार्यवाही से पोस्टकर्ता अचंभित क्यों हैं ? यह समझ से परे हैं। इस पुरे मामले में अपराधी के परिजन को किसी व्यक्ति ने दोषी नहीं कहा हैं, लेकिन हां उनका मकान इस लिए टूटा क्यूं कि अन्य अपराध करने वालो को इस कार्यवाही से सबक मिले कि उनकी गलती और अपराध की सजा परिजनों को भी भुगतना पड़ सकती है। इस तरह की कार्रवाई से कई हद तक अपराधों में रोकथाम होगी, कमी आएगी।
आरोपी के मकान टूटने से कोई अन्य व्यक्ति किसी मासूम बेटी, बहु, मां, बहन के साथ ऐसा कृत्य नहीं करेंगा, उसके दिल में कार्रवाई का डर बना रहेगा। मकान टूटने पर जिस तरह पोस्टकर्ता पत्रकार आरोपी के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहा है। ठीक उसी तरह मृतक बालिका के परिवार से भी जाकर मिल लेते, जिन्होंने अपनी 6 वर्ष की फूल जैसी बेटी को कम आयु में खोया। वो भी उसके साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई। पोस्टकर्ता पत्रकार मृतक बिटिया के परिवार से जाकर पूछे कि उन पर क्या बीत रही है ? और एक बार वह अपने ऊपर से भी सोचे कि यदि इस तरह की घटना उनके परिवार की मासूम बच्ची, बहु, बहन, बेटी व मां के साथ हुई होती तो उस स्थिति में वह क्या करते ? उन पर क्या बीतती।
इश्वर ना करे इस तरह की घटना उनके परिवार में घटे, क्योंकि इस तरह की घटना से वह परिवार कब और कैसे इस दुख की घड़ी से उभरता है ? यह उसी को ही पता है। इतनी शर्मशार और दिल दहला देने वाली घटना से परे होकर पोस्टकर्ता पत्रकार को केवल यह नागवार गुजरा कि आखिरकार जो अन्य पत्रकार कर रहे हैं उनके जैसा हम क्यों नहीं कर रहे हैं, तात्पर्य अन्य पत्रकारों की सक्रियता, सामाजिक गतिविधि उन पत्रकारों का हर जगह एक्टिव रहने से शायद पोस्टकर्ता को तीखी मिर्ची लग गई। पोस्टकर्ता ने पोस्ट के माध्यम से खुद की सस्ती लोकप्रियता बटोरने के चक्कर में पत्रकारों की जाइज़ मांग पर पूर्ण रूप से गलत टिप्पणी वाली पोस्ट वायरल करने से स्वयं को रोक नहीं पाए।
यह भी सत्य है कि पोस्टकर्ता पत्रकार नहीं चाहता कि कोई अन्य पत्रकार किसी की आवाज़ उठाए ? उसे उसका हक, अधिकार दिलाए या कोई सामाजिक गतिविधियां करे, हां यह ज़रूर चाहते कि यदि कोई कुछ अच्छा कर रहा है तो उसके कार्य में उंगली कैसे करें ? रोड़े कैसे डालें ? यदि पोस्टकर्ता के दिल में उक्त मृत्य बिटिया के प्रति थोड़ी भी संवेदना होती तो इस तरह की घटिया टिप्पणी वाली पोस्ट करता ही नहीं। यह मांग पत्रकारों के अलावा और भी संगठनों और लोगों ने उठाई थी लेकिन पोस्टकर्ता को इस बात की जलन हुई की इस मामले में पत्रकारों ने भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए आरोपी के मकान तोड़ने की मांग की। हम इश्वर से प्रार्थना करते हैं कि इस तरह की पोस्ट करने वाला पत्रकार हमारी सामाजिक गतिविधियों से यूंही जलते रहें।
फिर भी हम अपनी सामाजिक गतिविधि जारी रखेंगे, भले ही उनके अंदर की इंसानियत, मानवता मर चुकी हो, लेकिन हम अपने अंदर की इंसानियत, मानवता को जिंदा रखते हुए लोगों को न्याय दिलाने हेतु सदेव तत्पर रहेंगे। हम प्रशासन का पुन: धन्यवाद ज्ञापित करते हैं कि उनके द्वारा आरोपी का मकान तोड़ा गया। आरोपी का मकान तोड़ना हमारी नज़र में हमारे लिए मृतक बिटिया व परिजनों को न्याय दिलाने की एक पहली सीढ़ी सामान हैं। अभी आरोपी की दुसरी सजा फांसी बाकी है। खुद को बहुत सीनियर पत्रकार कहते फिरने वाले पत्रकार को अन्य पत्रकारों के लिए इस तरह की घटिया टिप्पणी करना बेहद ही शर्मनाक है। थोड़ी शर्म आना चाहिए कि जिन पत्रकारों ने जघन्य कृत्य करने वाले व्यक्ति के मकान तुड़वाने की कार्यवाही के लिए प्रशासन से निवेदन किया उस मांग को प्रशासन ने मानते हुए पुरा किया, लेकिन उस मृतक बेटी व उसके परिवार को छोड़ पोस्टकर्ता उक्त आरोपी के मकान टूटने से बेहद दुखी हैं।
पढ़े-लिखे शिक्षित व्यक्ति अनपढ़ वालो जैसी बाते करेगें तो कैसे चलेगा ? बेहरहाल कोई कुछ भी कहें, मेरी मेरी में आरोपी का मकान टूटना अन्य लोगों के लिए सबक हैं, जो भविष्य में अपराध करने के पहले सो बार सोचेंगे। हां इस तरह की कार्यवाई के लिए प्रशासन को जितना धन्यवाद दे उतना कम है। कहावत चरितार्थ हैं, मां बाप के कर्मों की सजा बच्चों को भुगतना पड़ती हैं, आज के कलयुग में गलत औलाद की सज़ा बेचारे मां, बाप परिजन भुगत रहे हैं। काश? उन्हें मां, बाप ने समय रहते यह समझाया, सिखाया होता कि बेटा अपने घर में भी मासूम नन्हीं बिटिया, मां, बहन, बहु, बेटी हैं और जीवन में कभी महिलाओ के प्रति गलत नहीं सोचना। तो आज ऐसे लोग जुर्म नही करते और आरोपी नहीं बनते। अब आरोपी बने हैं तो सभी क़ानूनी सज़ा के लिए तैयार रहना भी ज़रूरी है।
आरोपी के परिजन से कोई शिकायत नहीं लेकिन आरोपी ने जो गलत किया है उसके लिए तो विरोध जारी रहेगा। इसी कड़ी में दुसरी मांग आरोपी को केवल और केवल फांसी हो, यह मांग यथावत रहेंगी। पोस्टकर्ता चाहे तो भविष्य में आरोपी के प्रति सहानुभूति का हवाला देकर फांसी नहीं देने के लिए पोस्ट करता रहें। फिर भी हमारी फांसी देने वाली मांग यथावत रहेंगी। पोस्टकर्ता द्वारा पत्रकारों को कहा गया कि सस्ती लोकप्रियता के लिए किसी के साथ अन्याय करना, करवाना कहा कि पत्रकारिता हैं?
मैं पोस्टकर्ता पत्रकार को बताते चलूं कि हम बिना कुछ करे भी आमजन मानस में लोकप्रिय हैं। उक्त कार्यवाई लोकप्रियता बटोरने के लिए नहीं, बल्कि अन्य लोग अपराध नही करें, को लेकर की गई है। हमें शरिया कानून से लेना देना नहीं, हमारे देश के कानून पर भरोसा है, आरोपी को सज़ा ज़रूर मिलेंगी। पत्रकारों ने मांग करके कोई पाप नहीं किया, जो भी किया अच्छा ही किया। पाप के भागीदार तो आप इस तरह की घटिया पोस्ट करने के बन गए हेमू जी!
बिटिया हम शर्मिंदा हैं, तेरा कातिल जिंदा है।
