मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

सैफी गोल्डन जुबली कादरिया कॉलेज बुरहानपुर के प्रांगण में महाविद्यालय के विद्यार्थियों को वर्ष भर कराए गए विभिन्न निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं खेलकूद व विविध प्रतियोगिताओं में विजयी विद्यार्थियों को यहां आयोजित एक कार्यक्रम में प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
प्रथम सत्र में निदेशिका तसनीम मोहम्मद मर्चेंट, कादरिया एजुकेशन एंड कल्चरल सोसायटी के सचिव अलहाज मुल्ला अली असगर टाकलीवाला, कोषाध्यक्ष मोहम्मद भट्टी वाला,मंसूर सेवक, मोहम्मद मर्चेंट, प्राचार्य आई.ए. सिद्दीकी के कर कमलों से ब्यूटी पार्लर डिजिटल मार्केटिंग कंप्यूटर कोर्स एवं आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी छात्र एवं छात्राओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
दुसरे सत्र में शहर के जाने-माने शायर डॉ.वासिफ यार ने मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आगाज किया। कवि एवं कथाकार संतोष परिहार द्वारा-” कौन जाने क्या होने वाला है और चांद को चांद रहने दो” हास्य कविताओं का पाठ किया गया। इस अवसर पर कवियत्री प्रेमलता साँकले ने -“फलक से तारे तोड़ना है” एवं पर्यावरण चेतना को लेकर कविता प्रस्तुत की। चर्चित शायर फारूक नूर ने-” घर की उलझन से तबियत यू रही उलझी हुई, टेबल पर जैसे फाइल शाम तक बिखरी हुई।” गजल प्रस्तुत कर कार्यक्रम को नई ऊंचाइयां प्रदान की।
संदीप शर्मा “निर्मल” ने-“मौत तो बेजुबान होती है, जिंदगी ही बयान होती है।” ग़ज़ल द्वारा सदन की वाह वाही बटोरी। शायर बुरहान तनवीर ने-” हम हद ए मोहब्बत से गुजर जाए तो क्या हो, उसे फूल के आगोश में मर जाए तो क्या हो।” डा. वसीम यार ने-” मेरी हस्ती हड्डी खाल मिट्टी डाल, इसमें मेरा कौन कमाल मिट्टी डाल।” के माध्यम से सदन को नई ऊंचाइयां प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वासिफ यार ने किया।
संस्था द्वारा सभी कवि एवं शायरों का शाल श्रीफल प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मान किया गया। आमंत्रित अतिथियों एवं पालकगण का क़ादरिया कॉलेज की निर्देशिका श्रीमती तसनीम मोहम्मद मर्चेंट और क़ादरिया कॉलेज के प्राचार्य एवं सभी स्टाफ, सदस्य ने आभार व्यक्त किया।
