मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

खूनी भंडारा या खानी बन्दधारा या नेहरे खेरे जारी नाम की वास्तविक हकीक़त क्या है? पढ़िए सेवा सदन महाविद्यालय बुरहानपुर के उर्दू विभाग अध्यक्ष एवं उर्दू रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डॉक्टर एस एम शकील का यह ऐतिहासिक संदर्भ में विशेष आलेख | New India Times

युनेस्को के विश्व हेरिटेज सेंटर ने भारत की छ: ऐतिहासिक धरोहर को अस्थायी सूची में स्थान दिया है, हमारा सौभाग्य है कि हमारी ऐतिहासिक नगरी बुरहानपुर के अति प्राचीन, विश्व प्रसिद्ध, अद्वितीय जल स्रोत अब्दुल रहीम ख़ानख़ाना द्वारा निर्मित ” नहरे खैर जारी” जिसे आम भाषा में खूनी भंडारा/कुंडी भंडारा भी कहा जाता है शामिल है। इस घोषणा से बुरहानपुर के नागरिकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है।

आईए इस लेख के माध्यम से जानते हैं क्या है इस नहर का पौराणिक इतिहास और क्या है इस का वास्तविक नाम:

मुग़ल काल में जहांगीर के शासन काल  में अकबर के नव रत्नों में शामिल प्रसिद्ध हिंदी फ़ारसी कवि, बहुभाषी, कुशल सेनानायक,दानवीर , कुशल प्रशासक अब्दुल रहीम ख़ानख़ाना दकन के सूबेदार थे। कवि रहीम ने बुरहानपुर को कई ऐतिहासिक धरोहर दी जिन में शाहनवाज़ खान का मकबरा (काला ताजमहल), लालबाग, जनता हमाम, अकबरी सराए, भारत टॉकीज़ सराए, पान दानी मक़बरा, जामा मस्जिद का सहन व हौज़,  नहरे खैर जारी इत्यदि (आज का कुंडी भंडारा) भी शामिल है। कभी रहीम की रचना(दोहे) का फलसफा देखिए:
रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून।
रहीम ने इस दोहे में पानी को प्रतीक मान कर मर्यादा पालन की शिक्षा दी है। परंतु हम इस दोहे से समझ सकते है कि धरती पर पानी का क्या महत्व है तभी तो मानव सभ्यता के विकास के साथ हर युग मे पानी को संरक्षित करने के प्रयास किए गए हैं। पानी के महत्व को सामने रखते हुऐ ऐसा ही एक प्रयास सुबेदार अब्दुल रहीम ख़ानख़ाना ने बुरहानपुर में किया था।

बुरहानपुर नगर दकन का द्वार होने के कारण सैनिक छावनी हुआ करता था, यहाँ की जनसँख्या आज के मुकाबले दुगनी से अधिक थी। जिस के कारण पानी की बड़ी किल्लत थी।1612 में पानी की किल्लत के कारण नागरिक और सूबेदार रहीम ख़ानख़ाना परेशान थे। तब सुबेदार रहीम ने अपने कुशल इंजीनियरों के सहयोग से सतपुड़ा की तिलहट में पानी के जल स्त्रोत को खोज निकाला। यह जल स्त्रोत शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर खोजे गए। जिन्हें 80 से 100 फ़ीट जमीन में नहर के माध्यम से लाल बाग के जाली कारंज में जमा किया गया और भूमिगत नहर के माध्यम से नगर में पानी पहुंचाया गया। अब्दुल रहीम के सफल प्रयास से तत्समय बुरहानपुर वासियों की पानी की समस्या का समाधान किया गया था।

यह भूमिगत नहर 1615 में पूर्ण हुई ।पानी को वायु दबाव से आगे बढ़ाने के लिये और नहर में प्रकाश के लिये 110 कुंडियों का निर्माण किया गया जिस से पानी नगर तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की गई। इस जल स्त्रोत नेहरे खेरे जारी (कुंडी भंडारा) का पानी मिनरल वाटर के समान शुद्ध है। कई सरकारी एजेंसियों ने यहाँ के पानी की जांच की तो पता चला कि इस पानी की पी एच वेल्यु 2 है। पानी की शुद्धता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अंदर जमीन में जहाँ पानी जमा होता है वहाँ केल्शियम की मोटी परत जम गई है जो बड़ी खूबसूरत लगती है और ऐसा लगता है कि यह संगमरमर की दीवार है।

जहाँ तक इस भूमिगत नहर के नाम का सवाल है इस का नाम ” नहरे खैर जारी”  रखा गया जिस का मतलब होता है वह नहर जो भलाई के लिए जारी की गई हो। परन्तु आम जनता में इस नाम ” खानी बन्दधारा ” प्रसिद्ध हो गया। चूंकि अब्दुल रहीम ख़ानख़ाना ने इस का निर्माण कराया इस लिए उन्ही के नाम ख़ानख़ाना से खानी नाम हुआ और बन्द धारा यानी वह धारा जो बंद हो। दुर्भाग्यवश धीरे धीरे इस का नाम बिगड़ कर खूनी हो गया, साथ ही कुंडियों के कारण लोग इसे कुंडी भंडारा भी कहने लगे।

मुग़ल काल की इतिहासिक पुस्तको में इस का नाम नहरे खैर जारी ही मिलता है। किसी भी पुस्तक में खूनी भंडारा या कुंडी भंडारा नाम नही मिलता है।
अब्दुल रहीम ख़ानख़ाना के समकालीन प्रसिद्ध लेखक अब्दुल बाकी नाहवन्दी ने रहीम के जीवन व कार्य और एक पुस्तक “” मासरे रहीमी “‘लिखी है जिसे रहीम की जीवनी भी कहा जाता है। इस पुस्तक का एक अध्याय (चैप्टर) इसी नहर पर लिखा गया है। इस पुस्तक में भी इस नहर का नाम कही भी खूनी या कुंडी भंडारा नही लिखा है। बल्कि नहर खैर जारी ही लिखा गया है।

प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान मौलाना फ़रीदउद्दीन ‘ मनअम ‘ दहलवी जो ख़ानख़ाना के दरबारी कवि थे साथ ही ज्योतिष विद्या व गणित के प्रखर पंडित थे । मौलाना ने इस नहर का छन्दोंबध्द इतिहास फ़ारसी में लिखा है।जिस से पता चलता है कि इस नहर का नाम खैर जारी था और इस का निर्माण रहीम द्वारा 1024 हिजरी/ 1615 ईस्वी में हुआ था। उस फ़ारसी कविता का अनुवाद प्रस्तुत है।
1) दुनिया का नामवर सेनापति जो  बारगाहे सल्तनत का स्तंभ है।
2) उसका दानी हाथ सवाल नदी का पुल है और उसके हाथ की नमी बहार के बादल की तरह लाभ पहुंचाने वाली है।
3) उसने शहर में ऐसी नहर बनाई जिससे समस्त बाजार वह मकान वाले हर खास वह आम सभी तृप्त होते हैं।
4) जहांगीर बादशाह के शासनकाल में जिसके सर पर ताज गर्व करता है ।
5) इस नहर का कार्य समाप्त हुआ खुदा इस जल स्रोत का उपकार तभी बंद ना करे ।
6) अपने संस्थापक के दृढ़ शासन के समान जब तक दुनिया है यह नहर चलती रहे ।
7) जब दिले दाना ने इस नहर की तारीख पूछी तो हातिफ ने तुरंत उत्तर दिया “” खैर जारी “” 1024 हिजरी/ 1615 ईसवी।

काल का चक्र देखिये की जिस व्यक्ति ने पानी की समस्या का समाधान किया।जिस के नाम पर यह नहर थी उसे सिरे से ही हटाया जा रहा है। आज ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है। इस लेख के माध्यम से मैं शासन प्रशासन से आग्रह करता हुं कि इस नहर को खूनी भंडारा , कुंडी भंडारा जैसे गलत नाम से ना बुलाया जाए। मैं यह भी अनुरोध करूंगा कि जिला पर्यटन एवं पुरातत्व समिति के अनेक सदस्य जो इतिहास के अच्छे जानकार हैं, वह भी इस तथ्य को बुरहानपुर कलेक्टर के माध्यम से शासन तक पहुंचाएं ताकि नेहरे खेरे जारी का सही नाम यूनेस्को तक पहुंच सके। यह नहर हमारी विश्व धरोहर है। इसे इस के सही नाम ” नहर खैर जारी ” या ” खानी बन्द धारा ” के नाम से ही याद किया जाए। साथ ही उस स्थान पर भी सही नाम लिखा जाए जिस से पर्यटक सही इतिहास जान सके।

By nit

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