नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:
रशियन क्रांति से उपजी कम्युनिस्ट सोच ने दुनिया को आर्थिक समानता का नया विचार दिया है। भारत में गांधीवादी, समाजवादी, मार्क्सवादी और आंबेडकरवादी विचारधारा ने हिंदुत्ववादी प्रवाह को धरा पर मजबूत होने से रोकने का काम किया है। फ़ासिस्टों के कट्टर दुश्मन के तौर पर कम्युनिस्टों की अपनी महान वैचारिक विरासत है। इसी संबल के चलते सांसदीय लोकतंत्र में जनता के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन कैसे किए जाने चाहिए यह लाल बहादुरों से सीखना चाहिए। जामनेर में आयटक के गिने चुने कार्यकर्ताओं ने हाथ में लाल झंडा उठाकर मंत्री और उसकी सरकार को सच्चाई दिखाने की हिम्मत की। महाराष्ट्र राज्य ग्राम पंचायत कर्मचारी महासंघ (आयटक) जलगांव की ओर से ग्राम विकास मंत्री गिरिश महाजन के निजी निवास पर मार्च का प्रोग्राम था। आंदोलन में शरीक कार्यकर्ताओं ने तहसील कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया।

अभय यावलकर कमेटी मंजूर करे, न्यूनतम वेतन मंजूर किया जाए, निवास भत्ते की रकम खाते में जमा करी जाए, 10% आरक्षण से क्लास सी और डी की रिक्तियां त्वरित कार्रवाई से भरी जानी चाहिए, वेतन का 57 महिने का शेष फंड बहाल करें, रिटायर्ड कर्मी को पेंशन योजना लागू हो इत्यादि मांगों को लेकर बात रखी गई। प्रशासन की चौखट पर आवाज़ बुलंद कर रहे आंदोलकों को उनकी दुगनी संख्या में मौजूद पुलीस ने घेर लिया। होश में आओ होश में आओ गिरिश महाजन होश में आओ, संकट मोचक मुर्दाबाद, हिसाब दो हिसाब दो जैसे नारों को आप वीडियो में सुन सकते हैं। सत्ता के खिलाफ़ होने वाला कोई भी आंदोलन लोकतंत्र और उसमें रहने वाले नागरिकों के जीवंत होने का प्रमाण होता है। भारत को आजादी और लोकतंत्र कैसे मिला इसके बारे में लगातर बताया गया। लेकिन वो कौन सी ताकतें थी जो अंग्रेजों के साथ मिलकर इस देश के लोकतंत्र और आज़ादी के खिलाफ़ लड़ रही थी इसकी जानकारी देना ज़रूरी नहीं समझा गया यही वजह है की लोकतंत्र को बरकरार रखने के लिए देश में नया संघर्ष आरंभ हो चुका है।
