अशफ़ाक़ क़ायमखानी, सीकर/जयपुर (राजस्थान), NIT:

विधानसभा चुनाव का विष्लेषण करने पर प्रदेश की कुल पच्चीस सीटों में से ग्यारह सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार के जीतने की स्थिति बनने को सामने रखकर कांग्रेस पार्टी अपने सभी दिग्गज नेताओं को चुनाव में उतार कर नया खेल कर सकती है।
कल दिल्ली में वर्किंग कमेटी की बैठक में पांच राज्यों के चुनाव परिणाम व आगे की रणनीति के अलावा नागपुर में आयोजित होने वाली रैली पर चर्चा हुई। कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव में इण्डिया गठबंधन के घटकों से सीट बंटवारे के लिये मुकुल वासनिक के संयोजन में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन कर चुकी है। जिनमें से दो सदस्य अशोक गहलोत व मोहन प्रकाश राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं।
कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश चौधरी बाडमेर से, अशोक गहलोत जोधपुर से, सचिन पायलट दौसा या फिर अजमेर से, पूर्व डीजीपी हरीश मीणा टोंक-सवाईमाधोपुर से, गोविंद डोटासरा सीकर से, शांति धारीवाल कोटा से, प्रमोद भाया को बांरा-झालावाड़ से, भरतपुर से राजपरिवार के किसी सदस्य को, मुरारी मीणा को दोसा से, विजेंद्र ओला को झूंझुनू से, भंवर जितेंद्र या किसी दमदार यादव नेता को अलवर से, परशराम मोरदिया या गोविंद मेघवाल को बीकानेर से लोकसभा चुनाव लड़वाया जा सकता है।
इसके अलावा समझौता होने पर नागौर रालोपा व बांसवाड़ा-डूंगरपुर आदिवासी पार्टी के एवं एक सीट माकपा के लिये छोड़ी जा सकती है। उस स्थिति में माकपा कोशिश करेगी कि उन्हें कामरेड अमरा राम के लिये सीकर या फिर चूरु सीट मिले। भाजपा के पच्चीस लोकसभा सांसदों में से तीन के विधानसभा चुनाव हारने व तीन के जीतने के बाद लगता है कि एक दर्जन से अधिक उम्मीदवार नये आ सकते हैं।
कुल मिलाकर यह है कि वर्तमान में सभी पच्चीस सीटों पर भाजपा के सांसद हैं। राममंदिर उद्घाटन व राज्य सरकार बनने से भाजपा फिर से 2019 की तरह अपनी मज़बूत स्थिति मानकर चल रही है। जबकि कांग्रेस अपने दिग्गजों को चुनाव में उतार कर सीटें झटकने की कोशिश करेगी।
