रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

इंदौर-अहमदाबाद मार्ग पर अब सफर आसान हुआ, एन एच ए आई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आए, और टेस्टिंग के तौर पर शुरुआत की। इंदौर झाबुआ लंबे अरसे के बाद क्षेत्र के लोगों के साथ ही इंदौर-अहमदाबाद मार्ग पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खुश खबरी है।
इंदौर से अहमदाबाद आने-जाने के लिए अब संकरी पुलिया और घाट सेक्शन पर लगने वाले लंबे जाम, गड्ढों वाले रास्ते और दुर्घटना के डर के बीच यात्रा करने का दौर अब हुआ खत्म। माछलिया घाट सेक्शन में फोरलेन का निर्माण पूरा होने के बाद गुरुवार से यहां यातायात शुरू कर दिया गया। गुरुवार दोपहर नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की इंदौर पीआईयू के प्रोजेक्ट डायरेक्टर की मौजूदगी में आवाजाही शुरू हो चुकी है।
टोल दरों की जानकारी अभी कंपनी के जानकारों को नहीं
निर्माणकर्ता कंपनी के अफसरों ने बताया बुधवार को ही यातायात शुरू करना था, लेकिन प्रोजेक्ट डायरेक्टर के किसी दूसरे कार्यक्रम में अचानक जाने के कारण इसे एक दिन टाला गया। इस लिए आज गुरुवार दोपहर को यातायात शुरू किया जा चुका है। फिलहाल टेस्टिंग के तौर पर आवागमन शुरू किया गया है। औपचारिक रूप से टोल दरें कब बढ़ेंगी, इसकी जानकारी कंपनी के स्थानीय अफसरों को नहीं है। बुधवार तक आखिरी दौर का काम चल रहा था। इस हिस्से में सबसे ज्यादा परेशानी खाकरा की संकरी पुलिया, सांई मंदिर वाले यू टर्न, डूंगला पानी के खतरनाक मोड़ पर आती रही है।
यहां 17 मीटर तक ऊंचे पिलर हैं
घाट सेक्शन पर 800 मीटर से लंबे मेजर ब्रिज स्ट्रक्कर। इनमें से कुछ 17 मीटर तक ऊंचे छोटे-बड़े मिलाकर 52 पिलर बनाए गए व घाट सेक्शन में कटिंग के लिए इतनी ही जगह थी, जितने में रोड बनना था। वन क्षेत्र होने से आसपास की जगह नहीं मिली। ऐसे में खुदाई में काफी मेहनत व समय लगा। 30 मीटर गहराई तक पहाड़ियों की कटिंग की। हार्ड रॉक भी ज्यादा थी। पुराने रोड पर 9 तेज घुमाव वाले मोड़ हैं। अब ये सब नहीं रहेंगे।
फोरलेन घाट बन जाने के बाद अब दो से ढाई घंटे में इंदौर से झाबुआ पहुंच जाएंगे।
इंदौर-गुजरात हाईवे से झाबुआ पहुंचने में वर्तमान में 3 घंटे लगते हैं। इसमें से 30-40 मिनट घाट से गुजरने में लग जाते हैं। घाट पर जाम लग गया या किसी दुर्घटना के कारण रास्ता रोकना पड़े तो घाट सेक्शन में ही एक से डेढ़ घंटा लग जाता है। फोर लेन घाट बन जाने के बाद अब दो से ढाई घंटे में इंदौर से झाबुआ, मेघनगर, राणापुर पहुंच जाएंगे। इस फोरलेन से प्रतिदिन 10 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। इनमें 3 हजार के आसपास भारी वाहन शामिल हैं।
कब से शुरू हुआ व खर्च का ब्यौरा
2021 अप्रैल में शुरू हुआ था काम।
2023 अप्रैल तक काम पूरा होना था जिसे दिसम्बर में चालू कर दिये जाने की उम्मीद।
323 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट की लागत।
200 करोड़ रुपए घाट निर्माण पर खर्च।
सफर हुआ आसान वहान स्वामी एवं चालकों में खुशी।
